Yugendra pawar :- महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक्त शोक की लहर दौड़ गई, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान हादसे में निधन हो गया। इस दुखद घटना के बाद जहां पूरा पवार परिवार एकजुट नजर आया, वहीं एक नाम फिर से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया—युगेंद्र पवार।
अजित पवार के निधन के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर युगेंद्र पवार कौन हैं, उनका पवार परिवार से क्या संबंध है और 2024 में बारामती की सियासत में चाचा-भतीजे के बीच कैसी टक्कर देखने को मिली थी।
युगेंद्र पवार कौन हैं? क्या है अजित पवार से रिश्ता?
युगेंद्र पवार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार के पोते और अजित पवार के छोटे भाई श्रीनिवास पवार के बेटे हैं। करीब 32 वर्षीय युगेंद्र नई पीढ़ी के शिक्षित और सक्रिय नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अमेरिका के बोस्टन स्थित नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की पढ़ाई की है।
राजनीति में औपचारिक रूप से कदम रखने से पहले भी वे शरद पवार के साथ कई राजनीतिक कार्यक्रमों और रैलियों में सक्रिय रूप से नजर आते रहे। बारामती और आसपास के क्षेत्रों में उन्होंने धीरे-धीरे अपनी पहचान मजबूत की। वे पहली बार तब चर्चा में आए, जब उन्होंने अपनी चचेरी बहन सुप्रिया सुले के लिए चुनाव प्रचार किया।
2024 में बारामती बना सियासी रणक्षेत्र
बारामती सीट पवार परिवार की राजनीतिक विरासत का केंद्र रही है। लंबे समय तक इस सीट पर अजित पवार का प्रभाव रहा। लेकिन एनसीपी में विभाजन के बाद जब शरद पवार और अजित पवार अलग-अलग खेमों में बंट गए, तब बारामती की लड़ाई परिवार के भीतर की सियासी जंग में बदल गई।
साल 2024 के विधानसभा चुनाव में शरद पवार ने बड़ा दांव खेलते हुए युगेंद्र पवार को बारामती से उम्मीदवार घोषित किया। इसके बाद मुकाबला केवल दो नेताओं के बीच नहीं, बल्कि दो राजनीतिक विचारधाराओं और चाचा-भतीजे के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया। इस हाई-वोल्टेज चुनावी टकराव ने महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा दी और यह संकेत दिया कि पवार परिवार की नई पीढ़ी अब सक्रिय राजनीति में मजबूती से उतर चुकी है।
शरद पवार के संरक्षण में तैयार हुआ राजनीतिक कद
युगेंद्र पवार को शरद पवार का करीबी माना जाता है। उनके मार्गदर्शन में उन्होंने संगठन और जमीनी राजनीति को समझा। वे शरद पवार द्वारा स्थापित ‘विद्या प्रतिष्ठान’ के ट्रस्टी भी हैं, जिससे शिक्षा और युवाओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ बनी है।
लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सुप्रिया सुले के लिए गांव-गांव जाकर प्रचार किया और शरद पवार गुट की रणनीति में अहम भूमिका निभाई। वहीं, उनके पिता श्रीनिवास पवार ने भी राजनीतिक मतभेदों के चलते अजित पवार की खुलकर आलोचना की थी।
सामाजिक कार्यों के जरिए मजबूत जनाधार
युगेंद्र पवार सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। परिवार द्वारा संचालित ‘शारयू फाउंडेशन’ के माध्यम से वे विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़े हैं। इसके अलावा वे बारामती तालुका कुश्ती परिषद के प्रमुख हैं। दिसंबर 2023 में शरद पवार के जन्मदिन पर आयोजित कुश्ती प्रतियोगिता ने ग्रामीण और युवा वर्ग में उनकी लोकप्रियता को बढ़ाया।
आगे क्या होगी भूमिका?
अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि आने वाले समय में युगेंद्र पवार की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्हें शरद पवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले संभावित चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।
चाचा-भतीजे की सियासी टक्कर पहले ही महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम अध्याय बन चुकी है, और अब सबकी नजर इस बात पर है कि पवार परिवार की अगली पारी किस दिशा में जाती है।
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Author: Suryodaya Samachar
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