Bali :- इंडोनेशिया के मशहूर पर्यटक स्थल बाली द्वीप पर एक बार फिर प्रकृति ने कहर बरपाया है। ईस्ट नुसा तेंगारा प्रांत में स्थित माउंट लेवोटोबी लाकी-लाकी नामक सक्रिय ज्वालामुखी में मंगलवार को जोरदार विस्फोट हुआ, जिससे आसमान में लगभग 11 किलोमीटर ऊंचा राख का गुबार फैल गया। इसके चलते बाली समेत आसपास के तीन प्रमुख हवाईअड्डों को बंद कर दिया गया और हवाई सेवाएं बुरी तरह बाधित हो गईं।
✈️ 26 अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानें रद्द या विलंबित
इंडोनेशिया के परिवहन मंत्रालय ने पुष्टि की है कि कम से कम 26 उड़ानों को रद्द या स्थगित कर दिया गया है, जिससे 14,000 से अधिक यात्री प्रभावित हुए हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों तरह की उड़ानें शामिल हैं।
प्रभावित उड़ानों में शामिल हैं:
सिंगापुर एयरलाइंस की बाली-चांगी के बीच की चार उड़ानें
स्कूट एयरलाइंस की बाली और लोम्बोक के लिए उड़ानें
जेटस्टार (Qantas की सहायक कंपनी) की ऑस्ट्रेलिया से बाली की कई सुबह की उड़ानें
एयरएशिया मलेशिया और एयरएशिया इंडोनेशिया की बाली, लोम्बोक और लाबुआन बाजो की उड़ानें
जेटस्टार ने एक बयान में कहा कि, “पूर्वानुमान के अनुसार राख के बादल बुधवार रात तक हट सकते हैं, जिसके बाद उड़ानों की बहाली संभव होगी।”
🌋 ज्वालामुखी का दोहरा विस्फोट, अलर्ट स्तर उच्चतम पर
इंडोनेशिया की राष्ट्रीय ज्वालामुखी एजेंसी के अनुसार, माउंट लेवोटोबी लाकी-लाकी में पहला विस्फोट मंगलवार को और दूसरा विस्फोट बुधवार सुबह हुआ, जिससे दोबारा 1 किमी ऊंची राख निकली। इसके चलते अलर्ट लेवल को अधिकतम श्रेणी तक बढ़ा दिया गया है।
🏘️ दर्जनों ग्रामीणों का पुनर्वास, कोई हताहत नहीं
स्थानीय आपदा न्यूनीकरण एजेंसी की अधिकारी एवी हॉलन ने बताया कि विस्फोट से ज्वालामुखी के समीप दो गांवों — जेरो और लामालेरो — के दर्जनों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने कहा:
> “दोनों गांवों की सड़कें मोटी राख, बजरी और रेत से भर गई थीं। हालांकि अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।”
🌍 ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है इंडोनेशिया
इंडोनेशिया दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखीय क्षेत्रों में से एक है, जो प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है। यहां पर 130 से अधिक सक्रिय ज्वालामुखी हैं। माउंट लेवोटोबी लाकी-लाकी इससे पहले मई 2025 में भी फटा था, लेकिन तब इतनी बड़ी हवाई या जन-जीवन क्षति नहीं हुई थी।
📌 निष्कर्ष:
इस घटना ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि प्रकृति के सामने आधुनिक सुविधाएं भी असहाय हो सकती हैं। इंडोनेशियाई प्रशासन सतर्क है, और यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फ्लाइट स्टेटस की पुष्टि एयरलाइनों की वेबसाइट या ऐप्स से करें।
Author: Suryodaya Samachar
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