Varanasi news :- [रिपोर्टर सुजीत सिंह वाराणसी] दीपावली पर घरों में पूजन के बाद बची हुई सामग्रियों का गंगा नदी में विसर्जन करना एक आम प्रवृत्ति है, जिसे बदलने की आवश्यकता है। इस संबंध में नमामि गंगे अभियान ने रविवार को वाराणसी के अस्सी घाट पर स्वच्छता अभियान चलाया। अभियान का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना था ताकि गंगा और उसकी सहायक नदियों को पूजन सामग्रियों के कारण प्रदूषित होने से रोका जा सके। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत चलाए जा रहे इस अभियान में स्वयंसेवियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और लोगों को जागरूक करने का कार्य किया।
गंगा में पूजन सामग्री का विसर्जन और पर्यावरण पर इसका असर
दीपावली के त्योहारी मौसम में लोग अपने घरों में की गई पूजा के बाद बचे हुए फूल, पत्ते, दीपक, और अन्य पूजन सामग्रियों को गंगा में विसर्जित कर देते हैं। हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन वस्तुओं का विसर्जन जल में करना शुभ माना जाता है, परंतु इसके चलते नदी प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूजा में इस्तेमाल की जाने वाली प्रत्येक सामग्री का अपना विशेष महत्व होता है, और इनका उचित तरीके से विसर्जन करना ही पर्यावरण की रक्षा में सहायक हो सकता है।
नमामि गंगे द्वारा स्वच्छता अभियान और जागरूकता कार्यक्रम
अस्सी घाट पर नमामि गंगे अभियान के संयोजक राजेश शुक्ला, नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर, और महानगर प्रभारी पुष्पलता वर्मा के नेतृत्व में इस स्वच्छता अभियान को सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। स्वच्छता अभियान के दौरान घाट की सफाई की गई और घाट पर आए लोगों से निवेदन किया गया कि वे गंगा में किसी भी प्रकार की गंदगी और पूजन सामग्री न डालें। इस मौके पर राजेश शुक्ला ने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी विभागों और सफाई कर्मियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है।
जल प्रदूषण से जुड़ी चिंताएं
पूजन सामग्री जैसे फूल, अगरबत्ती, दीपक, तेल, और प्लास्टिक सामग्री जल में डालने से नदियों के जल की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे न केवल जल में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है, बल्कि जलीय जीव-जंतु भी प्रभावित होते हैं। गंगा के किनारे बसे क्षेत्रों के लोग इस जल का उपयोग पीने, नहाने और अन्य कार्यों के लिए करते हैं, इसलिए जल का स्वच्छ होना बहुत जरूरी है।
स्वयंसेवियों की भूमिका और आमजन में स्वच्छता के प्रति जागरूकता
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स्वच्छता अभियान में उपस्थित स्वयंसेवियों ने घाट पर आए हुए लोगों को गंगा की स्वच्छता के महत्व को समझाया और बताया कि नदियों में पूजन सामग्री डालने से जल प्रदूषण बढ़ता है। उन्होंने लोगों को यह भी बताया कि पूजा की सामग्रियों को किस प्रकार से री-साइकल किया जा सकता है। जैसे कि बचे हुए फूलों से जैविक खाद बनाई जा सकती है, जो न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि कृषि क्षेत्र में भी उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
कृषि और पर्यावरण पर गंगा के प्रदूषण का प्रभाव
गंगा का जल प्रदूषित होने से कृषि और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ता है। गंगा का पानी कई किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख साधन है, इसलिए इसके स्वच्छ रहने से फसलों की गुणवत्ता बनी रहती है। गंगा के प्रदूषित जल का उपयोग करने से किसानों की फसल भी प्रभावित हो सकती है, और इससे मानव स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
सफाई का महत्व और नैतिक जिम्मेदारी
नमामि गंगे के आयोजकों ने इस अवसर पर जनता से अपील की कि वे स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी समझें। राजेश शुक्ला ने बताया कि स्वच्छता सिर्फ बाहरी चीज़ नहीं है, बल्कि यह हमारी आंतरिक सोच और आदत का हिस्सा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हम सभी को स्वच्छता का संदेश फैलाना चाहिए और अपने आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक बनाना चाहिए। इसके लिए यह जरूरी है कि हम अपनी पुरानी आदतों में बदलाव लाएं और स्वच्छता को अपनी प्राथमिकता बनाएं।
कार्यक्रम में विशेष उपस्थिति और जनता में सकारात्मक प्रभाव
स्वच्छता अभियान में नमामि गंगे के अन्य अधिकारी, सी.एल. वर्मा, निधि वर्मा, शिवानी मिश्रा, शुभ शर्मा, और अन्य कई लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। जनता ने इस अभियान का स्वागत किया और स्वच्छता की अपील को सकारात्मक दृष्टिकोण से लिया। लोग समझने लगे हैं कि गंगा की स्वच्छता और पर्यावरण की रक्षा उनकी अपनी जिम्मेदारी है, और इसके लिए वे भी सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
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गंगा की स्वच्छता में सामुदायिक प्रयासों का महत्व
गंगा की स्वच्छता को बनाए रखने के लिए सामुदायिक प्रयासों की भी आवश्यकता है। यदि समाज के सभी लोग एकजुट होकर इस अभियान में शामिल होते हैं, तो गंगा की स्वच्छता को बनाए रखना संभव हो सकता है। लोगों को अपनी धार्मिक आस्थाओं के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा को भी ध्यान में रखना चाहिए, ताकि भविष्य में स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में हम सभी रह सकें।
नमामि गंगे अभियान के तहत चलाए जा रहे इस स्वच्छता कार्यक्रम से न केवल गंगा को स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी, बल्कि यह आम लोगों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा। गंगा की स्वच्छता हमारे देश की संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है। इस अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि स्वच्छता एक सामूहिक जिम्मेदारी है, और हम सभी को इसे निभाने के लिए आगे आना चाहिए।
Author: Suryodaya Samachar
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