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UGC Protest :- UGC नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, यूपी में जश्न और सियासी घमासान तेज

UGC Protest :- यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नियमों Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया नियमों की भाषा में स्पष्टता का अभाव है और दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने केंद्र सरकार से रेगुलेशन की समीक्षा कर संशोधित मसौदा लाने को कहा है। अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। तब तक 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में छात्रों और विभिन्न संगठनों ने खुशी जाहिर की। लखनऊ विश्वविद्यालय, प्रयागराज, मिर्जापुर, अमेठी, ललितपुर, बुलंदशहर और महोबा सहित कई जगहों पर मिठाई बांटी गई और आतिशबाजी की गई।

क्या है नया UGC नियम?
UGC ने 2026 में उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से यह नया रेगुलेशन लागू किया था। इसके तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी बनाने का प्रावधान है, जिसमें SC, ST, OBC, दिव्यांग और महिला प्रतिनिधित्व अनिवार्य होगा। यह कमेटी पिछड़े वर्गों के छात्रों की शिकायतों की सुनवाई कर समयबद्ध निपटारा करेगी और कैंपस में समानता का माहौल सुनिश्चित करेगी।

विरोध क्यों?
सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के कई छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने आरोप लगाया कि नियमों में केवल SC, ST और OBC के खिलाफ भेदभाव का उल्लेख है, जबकि जनरल कैटेगरी के छात्रों को समान संरक्षण नहीं दिया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे झूठी शिकायतों की आशंका बढ़ सकती है और कैंपस में तनाव पैदा हो सकता है।

इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिन पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है।

यूपी में क्या-क्या हुआ?
लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों ने फैसले को अपनी जीत बताया।
प्रयागराज में साधु-संतों ने गंगा तट पर फैसले का स्वागत किया और सरकार से बिल पूरी तरह खत्म करने की मांग की।
मिर्जापुर, अमेठी और ललितपुर में संगठनों ने जश्न मनाया और मिठाई बांटी।
बुलंदशहर में 11 भाजपा बूथ अध्यक्षों ने विरोध में इस्तीफा दे दिया।
गोरखपुर (DDU) में छात्रों और पुलिस के बीच झड़प की खबरें आईं।

महोबा में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

नेताओं की प्रतिक्रियाएं
बृजभूषण शरण सिंह (पूर्व सांसद): सुप्रीम कोर्ट ने बहुत अच्छा काम किया। यह बड़ा आंदोलन बनने जा रहा था, समाज का ताना-बाना बिगड़ सकता था।
केशव प्रसाद मौर्य (उपमुख्यमंत्री, यूपी): सर्वोच्च न्यायालय का जो भी आदेश होगा, वह स्वीकार्य है।
अजय राय (प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस): अदालत का धन्यवाद। ऐसा कानून बने जो सभी को समानता से देखे।

आगे क्या?
अब केंद्र सरकार को नियमों में संशोधन कर स्पष्टता लानी होगी। 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई होगी, जहां यह तय होगा कि संशोधित नियम लागू होंगे या नहीं। फिलहाल देशभर के विश्वविद्यालयों में 2012 के पुराने प्रावधान लागू रहेंगे।

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Author: Suryodaya Samachar

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