बड़ी खबर
Commonwealth Games 2026 :- कॉमनवेल्थ गेम्स में MP की बेटी यामिनी ने जीता सिल्वर, अजय गोल्ड से चूके Ebola Virus :- DR कांगो में तेजी से फैल रहा इबोला, WHO ने जारी की वैश्विक चेतावनी; अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की अपील Petrol-Diesel Price Today: 2 अगस्त को बदले ईंधन के दाम, जानिए आपके शहर में पेट्रोल-डीजल हुआ सस्ता या महंगा India Post :- रक्षाबंधन पर भारतीय डाक का खास तोहफा, 24-48 घंटे में पहुंचेगी राखी; पार्सल और डॉक्यूमेंट नियमों में भी बदलाव Patna University :- पटना यूनिवर्सिटी LLB प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र वायरल, मोबाइल से फोटो खींचकर किया लीक; परीक्षा रद्द नहीं होगी Indore News :- भोलेनाथ पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से इंदौर में बवाल, कांवड़ियों ने थाना घेरा; मौलाना पर FIR की मांग

Home » राष्ट्रीय » Sheetal Devi :- जिनके हाथ नहीं, लेकिन हौसले हैं बेमिसाल — शीतल देवी ने रचा इतिहास

Sheetal Devi :- जिनके हाथ नहीं, लेकिन हौसले हैं बेमिसाल — शीतल देवी ने रचा इतिहास

Sheetal Devi :- जन्म से ही बिना दोनों भुजाओं के पैदा हुईं जम्मू-कश्मीर की पैरा तीरंदाज शीतल देवी आज पूरे देश और दुनिया के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने एक बार फिर इतिहास रचते हुए जेद्दा में होने वाले एशिया कप (चरण-3) के लिए भारत की सक्षम जूनियर टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है।

यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि शीतल अब उन चुनिंदा एथलीटों में शामिल हो गई हैं, जो पैरालंपिक के साथ-साथ सक्षम (सामान्य) खिलाड़ियों की प्रतियोगिताओं में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।—

🌟 सीमाएं शरीर में नहीं, सोच में होती हैं

विश्व कंपाउंड चैंपियन शीतल ने यह साबित कर दिया है कि सीमाएं शरीर से नहीं, बल्कि मन से तय होती हैं। अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में शीतल ने अपनी संघर्षपूर्ण यात्रा साझा की थी, जिसने सभी को भावुक कर दिया।

टीम में चयन के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा —

> “जब मैंने शुरुआत की थी, मेरा एक छोटा-सा सपना था कि एक दिन सक्षम खिलाड़ियों के साथ मुकाबला करूं। शुरुआत में मैं असफल हुई, लेकिन हर हार से बहुत कुछ सीखा। आज वो सपना थोड़ा और करीब आ गया है।”

उनका यह संदेश केवल एक खिलाड़ी की भावनाएं नहीं, बल्कि हर उस इंसान की आवाज है जो सीमाओं से लड़ते हुए भी हार नहीं मानता।

🏹 भारत की सक्षम एशिया कप टीम

रिकर्व (पुरुष): रामपाल चौधरी, रोहित कुमार, मयंक कुमार
रिकर्व (महिला): कोंडापावुलुरी युक्ता श्री, वैष्णवी कुलकर्णी, कृतिका बिचपुरिया
कंपाउंड (पुरुष): प्रद्युमन यादव, वासु यादव, देवांश सिंह
कंपाउंड (महिला): तेजल साल्वे, वैदेही जाधव, शीतल देवी

🇹🇷 तुर्किये से मिली प्रेरणा

शीतल ने अपनी प्रेरणा तुर्किये की ओजनूर क्यूर गिर्डी से ली, जो पैरालंपिक और सक्षम दोनों श्रेणियों में भाग लेती हैं। 2024 पेरिस पैरालंपिक में मिश्रित टीम में कांस्य पदक जीतने वाली शीतल अब उसी राह पर आगे बढ़ रही हैं।

🥇 हौसले की मिसाल: पैर से चलाए तीर

सोनीपत में आयोजित राष्ट्रीय चयन ट्रायल में शीतल ने 60 से अधिक सक्षम खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने क्वालिफिकेशन राउंड में 703 अंक जुटाए — शीर्ष खिलाड़ियों के लगभग बराबर।

कंपाउंड टीम में अब तेजल साल्वे, वैदेही जाधव और शीतल देवी शामिल हैं — एक ऐसी टीम जो महिला सशक्तिकरण और दृढ़ संकल्प की प्रतीक है।

🌿 बचपन की प्रेरक कहानी

शीतल का बचपन जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के लोईधार गांव में बीता। पहाड़ी इलाके में जन्मी इस बच्ची ने हाथ न होने के बावजूद खुद को कभी कमजोर नहीं समझा।

वह पैरों से फुटबॉल खेलतीं, लकड़ी के धनुष से तीर चलातीं और पेड़ों पर आसानी से चढ़ जातीं। उनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वे पैर से बोतल को हवा में उछालकर सीधा खड़ा कर देती हैं — यही आत्मविश्वास आज उन्हें विश्व मंच पर ले आया है।—

💪 “पहले हाथ नहीं चले, अब पैर बोलते हैं”

शीतल कहती हैं —

> “मैं बचपन से हर काम पैरों से करती हूं — लिखना, खाना, खेलना, सबकुछ।”

शुरुआत में जब धनुष का वजन संभालना कठिन था, तो कोच कुलदीप वेदवान ने कहा था —

> “अगर यह लड़की पैरों से पेड़ पर चढ़ सकती है, तो तीरंदाजी में इतिहास भी रच सकती है।”
और सचमुच, उन्होंने इतिहास रच दिया।

🏆 एशियाई पैरा खेलों में स्वर्णिम सफलता

पिछले साल एशियाई पैरा खेलों में शीतल ने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। 2023 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ एशियाई युवा एथलीट का सम्मान भी मिला।

अब सक्षम तीरंदाजों की टीम में उनका चयन इंडियन स्पोर्ट्स इंक्लूजन की दिशा में एक बड़ा कदम है।

👨‍👩‍👧 परिवार का अटूट विश्वास

शीतल के पिता मान सिंह और मां शक्ति देवी हमेशा उनके हौसले की रीढ़ बने रहे। पिता कहते हैं —

> “लोग कहते थे कि हमारी बेटी कुछ नहीं कर पाएगी, लेकिन हमने उसे कभी कमजोर नहीं समझा।”

आज जब शीतल तिरंगा लहराती हैं, तो उनके माता-पिता की आंखों में सिर्फ गर्व के आंसू होते हैं।

“मेरे जैसा किस्मत वाला कोई नहीं”

एक संवाद कार्यक्रम में शीतल ने मुस्कुराते हुए कहा था —

> “मेरी जिंदगी में हमेशा अच्छे लोग आए। मुझे लगता है, मैं बहुत किस्मत वाली हूं।”

पहले वह टीचर बनना चाहती थीं, पर जिंदगी ने उन्हें तीरंदाज बना दिया। आज उनके पैरों से चलाए गए तीर हर दिल को छू लेते हैं, क्योंकि उनमें सिर्फ निशाना नहीं, बल्कि हौसले की आग होती है।

Shivam Dube : टिम डेविड ने लगाया तूफानी छक्का, शिवम दुबे ने अगली गेंद पर कर दिया खेल खत्म!

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

खबर से पहले आप तक

Leave a Comment

Live Cricket

ट्रेंडिंग