Sharda Murlidharan on colourism :- केरल की मुख्य सचिव शारदा मुरलीधरन ने 26 मार्च 2025 को उन लोगों को करारा जवाब दिया, जो रंग, लिंग और उनके कार्यकाल की तुलना उनके पति के कार्यकाल से कर रहे थे। उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखते हुए इस विषय पर खुली चर्चा की आवश्यकता जताई।
उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले भी इस मुद्दे पर पोस्ट लिखी थी, लेकिन नकारात्मक प्रतिक्रियाओं से घबराकर उसे हटा दिया था। हालांकि, उनके शुभचिंतकों ने उन्हें इसे दोबारा साझा करने की सलाह दी, जिससे वह सहमत हुईं और पुनः अपनी बात सामने रखी।
शारदा मुरलीधरन ने अपनी पोस्ट में क्या कहा?
मुख्य सचिव ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “मुख्य सचिव के रूप में मेरे कार्यकाल को लेकर एक टिप्पणी सुनी कि यह उतना ही काला है, जितना कि मेरे पति का कार्यकाल सफेद था। मुझे अपने कालेपन को स्वीकार करना होगा। यह वही पोस्ट है, जिसे मैंने सुबह लिखा था, लेकिन बाद में डिलीट कर दिया था।”
उन्होंने आगे कहा, “यह सिर्फ रंग की बात नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता की बात है, जो काले रंग को एक नकारात्मक प्रतीक मानती है। लेकिन सच तो यह है कि काला वही है, जो गलत करता है। केवल रंग ही काला नहीं होता, बल्कि अनैतिकता, बेरुखी और क्रूरता भी अंधकारमय होती है।”
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शारदा मुरलीधरन ने सवाल उठाया, “आखिर काले रंग को ही हमेशा नकारात्मक क्यों माना जाता है? वास्तव में, काला रंग ब्रह्मांड का आधार है। यह रंग ऊर्जा को अपने भीतर समाहित करने की क्षमता रखता है और शक्ति का प्रतीक है। यह हर किसी पर अच्छा लगता है, ऑफिस की वेशभूषा में इसे प्राथमिकता दी जाती है, यह काजल की खूबसूरती को परिभाषित करता है और बारिश की दस्तक का संदेश देता है।”
बचपन की एक यादगार घटना साझा की
उन्होंने अपने बचपन की एक घटना साझा करते हुए लिखा, “जब मैं चार साल की थी, तो मैंने अपनी मां से पूछा था कि क्या वह मुझे फिर से गर्भ में भेजकर गोरा और सुंदर बना सकती हैं। पिछले पचास वर्षों से मैं इस सोच से जूझ रही हूं कि मेरा रंग अच्छा नहीं है। मुझे यह महसूस कराया गया कि काले रंग में न तो सुंदरता है और न ही कोई मूल्य। गोरी त्वचा को हमेशा श्रेष्ठता का दर्जा दिया गया, और इस सोच ने मुझे यह मानने पर मजबूर कर दिया कि मैं किसी तरह कमतर हूं, जिसकी भरपाई किसी अन्य तरीके से की जानी चाहिए।”
कौन हैं शारदा मुरलीधरन?
शारदा मुरलीधरन 1990 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने सितंबर 2024 में अपने पति डॉ. वी. वेणु से केरल के मुख्य सचिव का पद संभाला।
उन्होंने 2006 से 2012 तक केरल सरकार के कुदुम्बश्री मिशन का नेतृत्व किया, जिसका उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना और गरीबी उन्मूलन की दिशा में कार्य करना था। इसके बाद, दिसंबर 2013 तक उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में मुख्य परिचालन अधिकारी के रूप में काम किया।
2014 से 2016 तक उन्होंने पंचायती राज मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) को बढ़ावा दिया। वह त्रिवेंद्रम की जिलाधिकारी भी रह चुकी हैं और विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रही हैं।
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Author: Suryodaya Samachar
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