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Neem Karoli Baba :- कौन थे नीम करोली बाबा? जिनसे प्रभावित हुए Steve Jobs, Mark Zuckerberg और Julia Roberts, ‘हनुमान अंश’ से फिर चर्चा में आया नाम

Neem Karoli Baba: उत्तराखंड के पहाड़ों में स्थित कैंची धाम आज दुनियाभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिकता का प्रमुख केंद्र है। इस जगह की पहचान जिस संत से सबसे ज्यादा जुड़ी है, वह हैं नीम करोली बाबा, जिन्हें उनके भक्त महाराज जी के नाम से भी जानते हैं। सादगी, प्रेम, सेवा और भक्ति को जीवन का आधार मानने वाले नीम करोली बाबा का प्रभाव भारत तक सीमित नहीं रहा। विदेशों में भी कई चर्चित लोगों ने उनके विचारों और आध्यात्मिक विरासत से प्रेरणा ली।

हाल ही में उनकी जिंदगी से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ के कारण एक बार फिर नीम करोली बाबा का नाम चर्चा में है। फिल्म उनके आध्यात्मिक सफर और भगवान हनुमान के प्रति उनकी गहरी आस्था को पर्दे पर प्रस्तुत करती है।

नीम करोली बाबा कौन थे?

नीम करोली बाबा का जन्म नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा बताया जाता है। उनका जन्म करीब 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में हुआ था। आगे चलकर वे आध्यात्मिक साधना के रास्ते पर चले और देश के अलग-अलग हिस्सों में साधु के रूप में रहे।

वे भगवान हनुमान के अनन्य भक्त माने जाते थे। उनके संदेशों में धार्मिक दिखावे की अपेक्षा प्रेम, करुणा, भक्ति और जरूरतमंदों की सेवा को अधिक महत्व दिया जाता था।

11 सितंबर 1973 को वृंदावन में उनका निधन हुआ, लेकिन उनके अनुयायियों के बीच उनकी शिक्षाओं और आध्यात्मिक विरासत का प्रभाव आज भी कायम है।

कैंची धाम बना उनकी विरासत का प्रमुख केंद्र

नीम करोली बाबा का नाम सबसे ज्यादा कैंची धाम से जुड़ा है। उत्तराखंड के नैनीताल क्षेत्र के पास स्थित यह आश्रम उनकी आध्यात्मिक विरासत का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

बाबा ने 1962 में कैंची धाम की स्थापना की थी। आज यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। खासकर 15 जून को होने वाले स्थापना दिवस के दौरान यहां भक्तों की बड़ी भीड़ देखने को मिलती है।

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कैंची धाम की खासियत इसकी सादगी और सेवा की परंपरा भी है। यहां भक्ति के साथ सामूहिक भोजन और सेवा जैसे कार्यों को भी महत्व दिया जाता है।

राम दास ने दुनिया तक पहुंचाया बाबा का संदेश

नीम करोली बाबा की शिक्षाओं को पश्चिमी दुनिया तक पहुंचाने में उनके अमेरिकी शिष्य राम दास की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

राम दास का वास्तविक नाम रिचर्ड अल्पर्ट था और वे हार्वर्ड से जुड़े मनोवैज्ञानिक थे। 1967 में भारत आने के बाद उनकी मुलाकात नीम करोली बाबा से हुई। इस मुलाकात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और वे आगे चलकर राम दास के नाम से प्रसिद्ध हुए।

उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा और भारत में मिले अनुभवों को चर्चित पुस्तक ‘Be Here Now’ में साझा किया। इस पुस्तक के माध्यम से पश्चिमी देशों में भारतीय आध्यात्मिकता और नीम करोली बाबा की शिक्षाओं के बारे में बड़ी संख्या में लोगों को जानकारी मिली।

Steve Jobs और नीम करोली बाबा का क्या संबंध था?

नीम करोली बाबा का नाम दुनिया के महान टेक उद्यमियों में शामिल Steve Jobs से भी जोड़ा जाता है। हालांकि एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि दोनों की मुलाकात नहीं हुई थी।

Steve Jobs 1970 के दशक में आध्यात्मिक मार्गदर्शन की तलाश में भारत आए थे और नीम करोली बाबा से मिलने की इच्छा रखते थे। लेकिन जब Jobs भारत पहुंचे, तब तक बाबा का 1973 में निधन हो चुका था।

इसके बावजूद Jobs ने भारत में समय बिताया और कैंची धाम भी पहुंचे। भारत की इस यात्रा को उनके जीवन के महत्वपूर्ण अनुभवों में गिना जाता है। बाद के वर्षों में उन्होंने अपने अनुभवों के बारे में भी बात की थी।

Mark Zuckerberg भी पहुंचे थे कैंची धाम

Facebook के संस्थापक Mark Zuckerberg का नाम भी नीम करोली बाबा की विरासत से जुड़ा है।

बताया जाता है कि Facebook के शुरुआती दौर में जब कंपनी मुश्किल दौर से गुजर रही थी, तब Zuckerberg भारत आए और कैंची धाम पहुंचे। उनकी यह यात्रा Steve Jobs की सलाह से जुड़ी बताई जाती है।

कैंची धाम की यात्रा के बाद Zuckerberg ने अपने अनुभव को कंपनी के उद्देश्य और अपनी सोच से जोड़कर देखा। इस घटना ने नीम करोली बाबा और दुनिया के बड़े टेक उद्यमियों के बीच संबंध को और चर्चा में ला दिया।

Julia Roberts भी बाबा की तस्वीर से हुईं प्रभावित

हॉलीवुड अभिनेत्री Julia Roberts का नाम भी नीम करोली बाबा के अनुयायियों से जुड़े चर्चित नामों में आता है।

Julia Roberts ने बताया है कि एक तस्वीर में नीम करोली बाबा को देखने के बाद उनके मन में उनके प्रति एक अलग तरह का आकर्षण पैदा हुआ। उस समय वह बाबा के बारे में ज्यादा नहीं जानती थीं, लेकिन उनकी तस्वीर ने उन्हें भारतीय आध्यात्मिकता और हिंदू धर्म की ओर आकर्षित किया।

बाद में उन्होंने एक इंटरव्यू में इस अनुभव के बारे में बात की, जिसके बाद नीम करोली बाबा का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक चर्चित हुआ।

क्या था नीम करोली बाबा का संदेश?

नीम करोली बाबा की शिक्षाओं का मूल किसी जटिल दर्शन में नहीं, बल्कि जीवन के बेहद सरल मूल्यों में दिखाई देता है।

उनके संदेशों में प्रमुख रूप से—

  • प्रेम और करुणा
  • निस्वार्थ सेवा
  • भगवान के प्रति विश्वास
  • सादगी से जीवन जीना
  • दूसरों की मदद करना
  • अहंकार से दूर रहना

जैसे विचारों को महत्व दिया जाता है। उनके अनुयायियों के अनुसार बाबा लोगों को केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित रहने के बजाय मानव सेवा को भी आध्यात्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानने की प्रेरणा देते थे।

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बाबा से जुड़े चमत्कारों की भी हैं कई कहानियां

नीम करोली बाबा के जीवन से जुड़ी कई चमत्कारिक कहानियां उनके भक्तों के बीच प्रचलित हैं। उनके अनुयायियों ने कई असाधारण अनुभवों का उल्लेख किया है।

हालांकि इन घटनाओं को मुख्य रूप से भक्तों और मौखिक परंपराओं के माध्यम से बताया गया है, इसलिए इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्यों के तौर पर नहीं देखा जा सकता। बाबा की लोकप्रियता का बड़ा आधार उनके जीवन का सादापन और प्रेम-सेवा का संदेश भी रहा है।

‘हनुमान अंश’ ने फिर बढ़ाई लोगों की दिलचस्पी

नीम करोली बाबा की जिंदगी से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने उनकी कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम किया है।

फिल्म में लक्ष्मण दास के बचपन से लेकर उनके आध्यात्मिक परिवर्तन और आगे चलकर नीम करोली बाबा के रूप में पहचान बनने की यात्रा को दिखाया गया है। कहानी में भगवान हनुमान के प्रति उनकी भक्ति, आध्यात्मिक खोज और मानव सेवा को प्रमुखता दी गई है।

फिल्म की सफलता के साथ ही कैंची धाम और नीम करोली बाबा को लेकर लोगों की दिलचस्पी भी एक बार फिर बढ़ी है।

क्यों आज भी याद किए जाते हैं नीम करोली बाबा?

नीम करोली बाबा ने अपने पीछे कोई बड़ा संस्थागत साम्राज्य नहीं छोड़ा, लेकिन उनके विचार उनके अनुयायियों के जरिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचे।

टेक्नोलॉजी की दुनिया से लेकर हॉलीवुड और आध्यात्मिक जगत तक उनके नाम का प्रभाव दिखाई देता है। Steve Jobs, Mark Zuckerberg और Julia Roberts जैसे चर्चित लोगों के साथ उनका नाम जुड़ना उनकी वैश्विक विरासत को खास बनाता है।

आज भी कैंची धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए बाबा का सबसे बड़ा संदेश यही माना जाता है कि प्रेम, सेवा और भक्ति को जीवन का हिस्सा बनाया जाए।

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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