संकट में उम्मीद की किरण: एक ओर जहां देशभर में शिक्षा को लेकर आर्थिक असमानता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, वहीं उत्तर प्रदेश के लखीमपुर-खीरी जनपद के पलिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक रोमी साहनी ने एक मिसाल कायम की है। विधायक साहनी पिछले साढ़े तीन वर्षों से निरंतर विधवा महिलाओं के बच्चों की शिक्षा का खर्च उठा रहे हैं, ताकि कोई भी बच्चा पिता के ना होने के कारण शिक्षा से वंचित न रह जाए।
भावुक कर देने वाला दृश्य: बसही कालोनी की मीना गौतम
आज का दिन भी कुछ ऐसा ही रहा, जब सम्पूर्णानगर क्षेत्र के ग्राम बसही कालोनी से आई एक महिला मीना गौतम विधायक से मिलने पहुंची। मीना के पति स्वर्गीय इन्दल गौतम कुछ समय पूर्व सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था। पति के चले जाने के बाद न तो कोई आय का साधन बचा और न ही कोई मदद करने वाला। मीना ने रोते हुए बताया कि बच्चों की स्कूल फीस भरने के लिए पैसे नहीं हैं। विधायक रोमी साहनी ने बिना किसी औपचारिकता के तत्काल आर्थिक मदद दी और आश्वासन दिया कि बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।
रेखा विश्वकर्मा की कहानी: तीन साल से मिल रही मदद
बाकेगंज क्षेत्र के ग्राम दौलतपुर ग्रांट नंबर 10 की रेखा विश्वकर्मा, जिनके पति स्वर्गीय पंकज विश्वकर्मा का निधन हो चुका है, के लिए विधायक साहनी एक फरिश्ते की तरह साबित हुए हैं। पिछले साढ़े तीन सालों से विधायक उनकी मदद कर रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ फीस भरी है, बल्कि रेखा के बच्चों की पढ़ाई के अन्य खर्चों में भी मदद दी है। यह कोई एक बार की मदद नहीं, बल्कि निरंतरता के साथ निभाया जा रहा सामाजिक कर्तव्य है।
राजनीति से ऊपर उठकर इंसानियत
यह पहल महज एक राजनीतिक गतिविधि नहीं, बल्कि इंसानियत की जीवंत मिसाल है। रोमी साहनी का यह कदम यह दिखाता है कि जनप्रतिनिधि अगर चाहें, तो अपने संसाधनों से सामाजिक बदलाव की दिशा में बड़ा योगदान दे सकते हैं। उनका मानना है कि “शिक्षा ही सबसे बड़ी शक्ति है, जो किसी भी परिवार को आत्मनिर्भर बना सकती है।”
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लोगों में बढ़ा भरोसा
इस तरह की मदद से विधायक रोमी साहनी न सिर्फ अपनी छवि को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि जनता के बीच एक संवेदनशील और जिम्मेदार नेता के रूप में स्थापित हो रहे हैं। उनके इस कार्य की सोशल मीडिया से लेकर गांव की चौपाल तक चारों ओर प्रशंसा हो रही है।
जब कोई पिता नहीं रहता, तो परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता बच्चों की पढ़ाई होती है। ऐसे में अगर कोई नेता आगे बढ़कर बिना किसी स्वार्थ के मदद है, तो वह राजनीति नहीं, सेवा कहलाती है। विधायक रोमी साहनी का यह प्रयास न सिर्फ एक प्रेरणा है, बल्कि एक संदेश भी — राजनीति का सबसे बड़ा धर्म सेवा है।
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Author: Suryodaya Samachar
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