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Mirzapur news:- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर नहीं उपलब्ध है दवाएं, बाहर की दवाएं खरीद खरीद कर मरीज परेशान

ब्यूरो कार्यालय सूर्योदय समाचार [मिर्जापुर]

Mirzapur news :- [ब्यूरो कार्यालय सूर्योदय समाचार मीरजापुर]भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए अनेक योजनाएं और नीतियां चलाई जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की स्थापना की गई है। लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर सरकारी दावों के विपरीत दिखाई देती है। मीरजापुर जिले के अहरौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उदाहरण इसका ताजा प्रमाण है, जहां दवाओं के अभाव और स्वास्थ्यकर्मियों की मनमानी से मरीज परेशान हैं।

दवाओं का अभाव और मरीजों की मजबूरी

अस्पताल में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता न होने से मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए विवश किया जा रहा है। सामान्य बीमारियों के लिए भी प्रिस्क्रिप्शन पर महंगी दवाएं बाहर की मेडिकल दुकानों से मंगाई जाती हैं। इससे गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

कई मामलों में यह भी देखने को मिला है कि दवा मरीज द्वारा खरीदी जाती है, पर उसके अस्पताल से चले जाने के बाद वही दवा उसी मेडिकल स्टोर को वापस कर दी जाती है। इस प्रक्रिया से यह अंदेशा और मजबूत होता है कि दवाओं की खरीद-फरोख्त के नाम पर आर्थिक लेन-देन हो रहा है।

जांच सुविधाओं का संकट

अहरौरा अस्पताल में सिर्फ दवाएं ही नहीं, बल्कि जांच की सुविधाएं भी प्रभावित हैं। दो माह से शुगर जांच किट उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण मरीजों को निजी पैथोलॉजी सेंटर में सौ से डेढ़ सौ रुपये खर्च कर जांच करानी पड़ रही है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाती है बल्कि गरीब तबके के लिए भारी समस्या भी है।

स्वास्थ्यकर्मियों का व्यवहार और जिम्मेदारी

अस्पताल में कार्यरत नर्सों पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। बताया जाता है कि कई नर्सें पिछले बारह वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात हैं। लंबे समय से एक ही जगह रहने के कारण उनमें ढिलाई और मरीजों के प्रति उदासीनता साफ नजर आती है। मरीजों के साथ उनका व्यवहार कठोर बताया जाता है, जो संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा के सिद्धांतों के विपरीत है।

इसके अतिरिक्त, नर्सों द्वारा प्रसव कराने आई महिलाओं को जानबूझकर निजी नर्सिंग होम भेजने की भी शिकायतें हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि अस्पताल और निजी संस्थानों के बीच लाभ कमाने का गठजोड़ हो सकता है।

मरीजों पर पड़ने वाला असर

इन परिस्थितियों के कारण अहरौरा और आसपास के गांवों से आने वाले मरीज निराश और हताश हैं। जिन लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर है, उनके लिए दवाएं और जांच दोनों भारी पड़ रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवाएं जब असमान हो जाती हैं, तो आम जनता में सरकार के प्रति विश्वास कम होता है। कई बार लोग छोटी बीमारियों को भी नजरअंदाज करने लगते हैं क्योंकि वे खर्च वहन नहीं कर पाते। परिणामस्वरूप उनकी स्थिति बिगड़ जाती है और गंभीर रोग का खतरा बढ़ जाता है।

संभावित कारण

इस स्थिति के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं:

प्रशासनिक लापरवाही – समय पर दवाओं और उपकरणों की आपूर्ति न होना।

भ्रष्टाचार – मेडिकल स्टोर और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच मिलीभगत।

कर्मचारियों का लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनात रहना – इससे कार्य में पारदर्शिता और जिम्मेदारी की कमी आती है।

निगरानी तंत्र का अभाव – स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियमित निरीक्षण न होना।

समाधान की दिशा

इस समस्या का समाधान कई स्तरों पर किया जा सकता है:

दवा और उपकरण की आपूर्ति – सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाएं और जांच की किट हमेशा उपलब्ध रहें।

नियमित निरीक्षण – जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा औचक निरीक्षण किए जाएं।

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कर्मचारियों का रोटेशन – नर्सों और अन्य कर्मचारियों को समय-समय पर स्थानांतरित किया जाए।

जनसहभागिता – मरीजों और समाज के लोगों को भी यह अधिकार होना चाहिए कि वे स्वास्थ्य सेवाओं में गड़बड़ी की शिकायत उच्च स्तर पर दर्ज करा सकें।

कठोर कार्रवाई – यदि किसी कर्मचारी या चिकित्सक पर भ्रष्टाचार या मरीजों के शोषण का आरोप सिद्ध होता है, तो उस पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।

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स्वास्थ्य सेवाएं हर नागरिक का मौलिक अधिकार हैं और इन्हें ईमानदारी व पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराना सरकार और स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है। अहरौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हो रही अनियमितताएं सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं बल्कि पूरे देश में व्याप्त व्यवस्था संबंधी खामियों का हिस्सा हैं।

जरूरी है कि इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाए और सुधारात्मक कदम उठाए जाएं ताकि मरीजों को उनकी जरूरत के अनुसार सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

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Author: Suryodaya Samachar

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