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Mirzapur news :- जिले में भरा बाढ़ का पानी, फसलें प्रभावित, जारी किए गए टोल नंबर

Mirzapur news :- उफान पर होने से कोन, सिटी, पहाड़ी, सीखड़, चुनार, नारायणपुर, जमालपुर आदि गंगा के तटवर्ती इलाकों में बसे गांवों में लोगों की चिंता बढ़ गई है। संयुक्त कृषि निदेशक डा. अशोक उपाध्याय ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित किसान आपदा के 72 घंटे के अंदर सूचना दे सकते हैं। टोल फ्री नंबर 14447 पर बीमा कंपनी को सूचना दे सकते हैं।

जिला कृषि अधिकारी डा. अवधेश कुमार यादव ने बताया कि फसल की बोआई के किसी भी कारण असफल होने पर बीमित राशि का 25 प्रतिशत धनराशि किसानों को तत्काल बीमा कंपनी देगी। फसल की बुवाई से कटाई की अवधि में आपदाओं, ओला, भूस्खलन, जल प्लावन से फसल की क्षति होने अथवा फसल की कटाई के उपरांत 14 दिनों की अवधि तक खेत में कटी हुई फसलों को बेमौसम-चक्रवाती वर्षा, चक्रवात से क्षति की स्थिति में व्यक्तिगत बीमित किसान तटवर्ती लोग रहें सतर्क, वाढ़ में दिक्कत होने पर फोन करें।

मीरजापुर : गंगा में अचानक जलस्तर बढ़ोतरी को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। एडीएम शिव प्रताप शुक्ल ने शनिवार को सदर व तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित कई इलाकों में दौरा किया और व्यवस्था चाक चौबंद रखने के निर्देश दिए। बताया कि दोनों तहसील क्षेत्रों में कुल 37 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। वर्तमान में इन बाढ़ चौकियों पर राहत संबंधी सभी उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं। बताया कि सदर तहसील में बाढ़ नियंत्रण कक्ष का फोन नंबर 05442-220188 और चुनार में स्थापित बाढ़ नियंत्रण कक्ष का फोन नंबर 05442-222413 है।

के स्तर पर क्षति का आंकलन कर क्षतिपूर्ति की धनराशि दी जाएगी। उप कृषि निदेशक विकेश कुमार पटेल ने बताया कि जनपद में 81,088 किसानों ने अपनी फसल का बीमा कराया है।

जनपद में गंगा नदी का जल स्तर और स्थिति कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे वर्षा, बाढ़, और नदी की सफाई परियोजनाएँ। यदि आप किसी विशेष जनपद में गंगा का पानी जानना चाहते हैं, तो इसमें निम्नलिखित बातें महत्वपूर्ण हो सकती हैं:

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1. जल स्तर : मानसून के दौरान गंगा का जल स्तर बढ़ सकता है, जिससे बाढ़ का खतरा होता है। मानसून के बाद पानी का स्तर सामान्य हो जाता है।

2. स्वच्छता :- सरकार द्वारा कई “नमामि गंगे” जैसी परियोजनाएँ चलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य गंगा के पानी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाना है।

3. बाढ़ की स्थिति :- गंगा के जल स्तर में वृद्धि के कारण आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ आ सकती है, जिसका असर जनपद के निवासियों पर पड़ता है। स्थानीय प्रशासन अक्सर इसके लिए चेतावनी जारी करता है।

4. सिंचाई और जल उपयोग :- कई क्षेत्रों में गंगा के पानी का उपयोग सिंचाई और पेयजल के रूप में किया जाता है, इसलिए इसका स्तर और स्वच्छता ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

वरिष्ठ रिपोर्टर तारा त्रिपाठी, मिर्जापुर।

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Author: Suryodaya Samachar

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