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Media Power:- पत्रकार समाज का दर्पण और लोकतंत्र की धड़कन, वरिष्ठ समाजसेवी प्रमोद केसरी का बयान

Media Power :– वरिष्ठ समाजसेवी प्रमोद केसरी ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ होने के साथ-साथ समाज का दर्पण और लोकतंत्र की धड़कन है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र के चारों स्तम्भ – न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और पत्रकारिता – आपस में चोली-दामन का संबंध रखते हैं और इनकी मजबूती से ही लोकतंत्र सशक्त होता है।

प्रमोद केसरी ने कहा कि पत्रकार न केवल समाज की घटनाओं का साक्षी होता है बल्कि उन घटनाओं को प्रकाश में लाकर लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखता है। उन्होंने पत्रकार की जिम्मेदारियों को रेखांकित करते हुए कहा कि पत्रकार प्रशासन से पहले घटनास्थल पर पहुंचता है, सच्चाई की खोज करता है और जनता तक तथ्य पहुंचाने का कार्य करता है। कई बार वही सच्चाई सामने लाकर किसी पीड़ित को न्याय दिलाने में भी मददगार होता है।

उन्होंने कहा कि पत्रकार का दायित्व इतना बड़ा है कि यदि वह अपनी जिम्मेदारी निभाना छोड़ दे तो अखबार का पन्ना कोरा रह जाएगा। चाहे गर्मी, बरसात हो या कड़ाके की ठंड – पत्रकार को हमेशा मैदान में रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है। इस दौरान उसे अपनी निजी खेती, व्यापार और पारिवारिक कार्यों से भी समझौता करना पड़ता है।

प्रमोद केसरी ने पत्रकारिता को खतरों से भरा पेशा बताते हुए कहा कि सच्चाई उजागर करने से कई बार पत्रकारों को नाराजगी, विरोध और यहां तक कि जान से हाथ धोने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा –
“पत्रकार की लेखनी तलवार की धार के समान है, जो सत्य को उजागर भी करती है और कभी ढाल का कार्य भी निभाती है।”

उन्होंने एक प्रेरक पंक्तियों के माध्यम से पत्रकारिता की शक्ति को व्यक्त किया –

सोंच में अत्यधिक धार होनी चाहिए,
और कलम को तलवार होनी चाहिए।
बदल दोगे वक्त को तुम पल भर में,
बस समय पर सही वार होनी चाहिए।”

समाजसेवी प्रमोद केसरी ने आगे कहा कि पत्रकारिता की असली पहचान सच्चाई और निष्पक्षता में निहित है। सच्चाई से पत्रकारिता को ऊंचाई मिलती है और निष्पक्षता से गौरव। लेकिन जब पत्रकारिता चाटुकारिता की भेंट चढ़ जाती है तो उसकी गरिमा खो जाती है।

उन्होंने पत्रकारों की सुरक्षा को न्यायसंगत अधिकार बताते हुए कहा कि जब जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराए जाते हैं तो समाज के असली प्रहरी पत्रकारों की सुरक्षा की भी गारंटी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की एकजुटता के बिना यह संभव नहीं है, इसलिए समय आ गया है कि पत्रकार एकजुट होकर सरकार से अपनी सुरक्षा की मांग करें।

इसके साथ ही उन्होंने तहसील स्तर पर पत्रकारों के लिए बैठक, विश्राम और लेखन हेतु छायादार स्थल उपलब्ध कराने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि यह मांग वर्षों से लंबित है और इसे धरातल पर उतारना समय की जरूरत है।

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Author: Suryodaya Samachar

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