Kirti Pandey Resigned :- उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UP Education Service Selection Commission) की अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। यूपी सरकार ने उनका त्यागपत्र स्वीकार कर लिया है।
सिर्फ एक साल पहले बनीं अध्यक्ष कीर्ति पांडेय ने 22 सितंबर को शासन को अपना इस्तीफा भेजा था, जिसे शुक्रवार को स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद आयोग के वरिष्ठ सदस्य और न्यायिक सेवा के पूर्व अधिकारी रामसुचित ने कार्यवाहक अध्यक्ष का कार्यभार संभाल लिया। हालांकि इस्तीफे में व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया गया, लेकिन सूत्रों का मानना है कि आयोग के अंदर की गुटबाजी और कामकाज में सुस्ती ही उनकी विदाई का बड़ा कारण रहा। इस्तीफे के तुरंत बाद नए अध्यक्ष की तलाश के लिए विज्ञापन भी जारी कर दिया गया।
कार्यवाहक अध्यक्ष ने गिनाईं प्राथमिकताएं
नए कार्यवाहक अध्यक्ष रामसुचित ने पद संभालने के बाद अपनी प्राथमिकताएं तय कीं। उन्होंने कहा कि शासन के निर्देशानुसार पहले असिस्टेंट प्रोफेसर (910 पद), प्रवक्ता (PGT) (624 पद) और टीजीटी (3539 पद) की परीक्षाओं का आयोजन समय पर करवाना होगा। इसके साथ ही उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, बेसिक शिक्षा और व्यवसायिक शिक्षा विभागों से अधियाचन लेकर भर्ती प्रक्रिया को तेज करना उनकी प्राथमिकता है।
अब शासन पर बढ़ेगी निर्भरता
जानकारों का मानना है कि नियमित अध्यक्ष के अभाव में आयोग की निर्भरता शासन पर और बढ़ जाएगी। नियमित अध्यक्ष अपनी नीतिगत बैठकें कर सकते थे, लेकिन कार्यवाहक अध्यक्ष को हर बड़े फैसले से पहले शासन की अनुमति लेनी होगी।
21 अक्तूबर तक नए अध्यक्ष के लिए आवेदन
शासन ने नए अध्यक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी है। विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी की ओर से जारी विज्ञापन में कहा गया है कि 21 अक्तूबर शाम 6 बजे तक आवेदन स्वीकार होंगे। अध्यक्ष पद के लिए आईएएस अफसर (प्रमुख सचिव स्तर), विश्वविद्यालय के कुलपति या दस साल का प्रोफेसर और तीन साल का प्रशासनिक अनुभव रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। कार्यकाल तीन साल या 65 वर्ष की आयु तक होगा।
इस्तीफे की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी
खबर है कि प्रो. कीर्ति पांडेय ने 22 सितंबर को ही इस्तीफा भेज दिया था। उसी दिन आयोग के उपसचिव डॉ. शिवजी मालवीय का स्थानांतरण कर दिया गया था। 25 सितंबर से असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के साक्षात्कार होने थे, लेकिन उससे ठीक पहले उन्होंने बैठक में लिखित परीक्षा पर आपत्ति मांगने का निर्णय लिया। यह उनका बतौर अध्यक्ष आखिरी फैसला रहा।
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सालभर का कार्यकाल और विवाद
गोरखपुर विश्वविद्यालय की समाजशास्त्र विभाग की शिक्षिका प्रो. कीर्ति पांडेय को 1 सितंबर 2024 को अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजना के तहत भर्तियों को तेजी से पूरा करने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी। लेकिन एक साल के भीतर आयोग भर्ती परीक्षाएं टालने और विवादों के कारण चर्चा में रहा।
अप्रैल 2025 में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा के दौरान आयोग के संविदा कर्मचारी महबूब अली की गिरफ्तारी से आयोग की छवि धूमिल हुई।
टीजीटी परीक्षा की तारीख तीन बार और पीजीटी परीक्षा की तारीख चार बार टाली गई।
अब टीजीटी परीक्षा 18-19 दिसम्बर को और पीजीटी परीक्षा 15-16 अक्तूबर को प्रस्तावित है।
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Author: Suryodaya Samachar
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