Jyoti Yarraji :- भारतीय एथलेटिक्स में एक नया इतिहास रचते हुए ज्योति याराजी ने एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 (गुमी) में 100 मीटर बाधा दौड़ में 12.96 सेकेंड का शानदार समय निकालकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। बारिश से प्रभावित कठिन परिस्थितियों में यह प्रदर्शन करते हुए उन्होंने न केवल अपना खिताब बचाया, बल्कि चैंपियनशिप का नया रिकॉर्ड भी कायम किया। यह जीत एशियाई स्तर पर उनकी निरंतर श्रेष्ठता को दर्शाती है और भारतीय महिला ट्रैक स्पर्धाओं को नई पहचान देती है। 25 वर्ष की उम्र में ज्योति अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ दौर में हैं।
प्रारंभिक जीवन, पृष्ठभूमि और उम्र
28 अगस्त 1999 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में जन्मी ज्योति याराजी वर्तमान में 25 वर्ष की हैं। उनका पालन-पोषण सीमित संसाधनों वाले परिवार में हुआ। पिता निजी सुरक्षा गार्ड थे और मां अस्पताल में सफाई कर्मी के रूप में कार्य करती थीं। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद खेल उनके जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता बना। पोर्ट हाई स्कूल, कृष्णा (विजाग) में पढ़ाई के दौरान उनकी लंबाई, फुर्ती और समन्वय क्षमता ने कोचों का ध्यान खींचा।
ट्रेनिंग का सफर और तकनीकी विकास
ज्योति ने 2015 में प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स की शुरुआत की और आंध्र प्रदेश इंटर-डिस्ट्रिक्ट प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। 2016 में उन्होंने हैदराबाद स्थित साई सेंटर जॉइन किया, जहां ओलंपियन और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता एन. रमेश के मार्गदर्शन में उनकी तकनीकी नींव मजबूत हुई। 2019 में भुवनेश्वर के ओडिशा रिलायंस एथलेटिक्स हाई परफॉर्मेंस सेंटर में ब्रिटिश कोच जेम्स हिलियर के साथ प्रशिक्षण ने उनके करियर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया।

रिकॉर्ड, संघर्ष और बड़ी सफलता
शुरुआती वर्षों में कई तेज दौड़ के बावजूद, हवा की गति और तकनीकी कारणों से उनके रिकॉर्ड मान्य नहीं हो पाए। आखिरकार मई 2022 में साइप्रस इंटरनेशनल मीट में 13.23 सेकेंड का समय निकालकर उन्होंने भारत का पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा। इसके बाद लगातार 13 सेकेंड से कम समय की दौड़ उनकी पहचान बन गई।
मेडल रिकॉर्ड और एशियाई दबदबा
2023 की एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर ज्योति ने एशिया में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। उसी वर्ष उन्होंने FISU वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में कांस्य और एशियन गेम्स में रजत पदक भी जीता। 2025 में गुमी में खिताब बचाते हुए उन्होंने चैंपियनशिप रिकॉर्ड बनाया और खुद को एशिया की शीर्ष बाधा धाविकाओं में स्थापित किया।

ओलंपिक सफर, सम्मान और आगे की राह
पेरिस ओलंपिक 2024 में उन्होंने ओलंपिक पदार्पण किया, हालांकि रेपेचेज राउंड में बाहर हो गईं। इसके बावजूद यह अनुभव उनके करियर के लिए अहम साबित हुआ। 2024 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अब उनका लक्ष्य रिएक्शन टाइम, बाधा तालमेल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा को और बेहतर करना है, साथ ही विश्व चैंपियनशिप पर नजरें टिकी हैं।
25 साल की उम्र में ज्योति याराजी भारतीय स्प्रिंट हर्डलिंग का नया चेहरा बन चुकी हैं। उनका सफर संघर्ष, अनुशासन और निरंतर प्रगति की मिसाल है।
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Author: Suryodaya Samachar
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