मैनपुरी में दलित छात्र के साथ अमानवीय व्यवहार : मैनपुरी जिले के थाना किशनी क्षेत्र के ग्राम हरिपुर कैथोली स्थित एक सरकारी स्कूल में एक गंभीर और शर्मनाक घटना सामने आई है, जहां एक दलित छात्र के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। इस घटना ने न सिर्फ समाज में व्याप्त जातिवाद की कड़वी सच्चाई को उजागर किया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।
क्या था पूरा मामला?
मामला मैनपुरी के एक सरकारी स्कूल का है, जहां एक दलित छात्र ने स्कूल में रखी पानी की बोतल को छू लिया। छात्र की यह मासूमियत उसे महंगी पड़ी, क्योंकि उस पर विद्यालय के शिक्षक ने न सिर्फ गुस्से में आकर उस पर शारीरिक हमला किया, बल्कि उसे बेरहमी से पीटते हुए उसकी उंगली भी तोड़ दी। घटना इतनी गंभीर थी कि छात्र को इलाज के लिए अस्पताल भी ले जाना पड़ा।
इस बर्बरता का कारण मात्र इतना था कि छात्र ने पानी की बोतल छू ली, जो एक पूरी तरह से मनगढ़ंत और जातिवाद से प्रेरित आरोप था। यह घटना न केवल उस बच्चे के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या आज भी हमारे समाज में जातिवाद और भेदभाव का यह घिनौना रूप मौजूद है?
पिटाई से घायल छात्र ने किया पुलिस से संपर्क
घटना के बाद छात्र ने अपने परिजनों के साथ मिलकर किशनी थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस की ओर से इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस की निष्क्रियता ने इस घटना को और भी शर्मनाक बना दिया। इसके बाद, छात्र और उसके परिवार ने एसपी कार्यालय का रुख किया और न्याय की मांग की।
जातिवाद और शिक्षा व्यवस्था की कड़ी आलोचना
यह घटना सिर्फ एक व्यक्तिगत दुर्व्यवहार की नहीं, बल्कि हमारे समाज में फैले जातिवाद और भेदभाव की गहरी जड़ों को दर्शाती है। यह भी दर्शाता है कि हमारे शिक्षा संस्थानों में बच्चों को एकजुटता, समानता और भाईचारे की शिक्षा देने के बजाय उन्हें धार्मिक और जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
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स्कूलों में बच्चों को शिक्षा देने का मुख्य उद्देश्य उन्हें समाज में समान और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ने के लिए तैयार करना होता है। लेकिन इस तरह की घटनाएं यह साबित करती हैं कि आज भी हमारे शिक्षा संस्थान सुरक्षित नहीं हैं, खासकर जब बात दलित समुदाय के बच्चों की आती है।
क्या होनी चाहिए कार्रवाई?
इस मामले में पुलिस और प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्हें इस घटना को केवल एक मामूली विवाद के रूप में न देखकर, इसे गंभीरता से लेते हुए दोषी शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। शिक्षक का यह बर्ताव उस स्कूल के बच्चों के लिए खतरनाक उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह न केवल उस छात्र के लिए अपमानजनक है, बल्कि समूचे समाज के लिए भी चिंताजनक है।
आखिरकार, सवाल यह है कि क्या हम एक ऐसे समाज में रह रहे हैं जहां बच्चों को उनके अधिकार, सम्मान और समानता का आदान-प्रदान न हो? क्या बच्चों को यह समझाने के बजाय कि वे सभी समान हैं, हमें उन्हें विभाजन और भेदभाव के बीज बोने के लिए छोड़ देना चाहिए?
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Author: Suryodaya Samachar
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