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आईआईटी (बीएचयू) में नव-निर्मित कैफेटेरिया का लोकार्पण — छात्रों और स्टाफ के अनुभव को मिलेगा नया आयाम

रिपोर्टर सुजीत सिंह वाराणसी

वाराणसी। बहुप्रतीक्षित नव-निर्मित आईआईटी (बीएचयू) कैफेटेरिया का लोकार्पण 11 मई 2025 को हुआ। इस अवसर पर माननीय निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने संस्थान के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में नवनिर्मित कैफेटेरिया का उद्घाटन किया। इस आयोजन में डीन फैकल्टी अफेयर्स प्रो. एन.के. मुखोपाध्याय, डीन स्टूडेंट्स अफेयर्स प्रो. राजेश कुमार, प्रो. इन्चार्ज प्रो. रंजीत महंती, चेयरमैन, आईडब्ल्यूडी प्रो. एस.बी. द्विवेदी, चेयरमैन, काउंसिल ऑफ वॉर्डन प्रोफेसर राकेश कुमार सिंह, चीफ प्रॉक्टर प्रो. संजय सिंह, प्रो. एस.के. श्रीवास्तव, प्रो. आभा मिश्रा, जीटीएसी प्रबंधन समिति के सदस्य डॉ. मेघांशु वशिष्ठ (अध्यक्ष), डॉ. वी. एन. लाल एवं डॉ. मेधा झा (सदस्य), श्री प्रदीप कुमार दुबे (सदस्य सचिव), छात्रगण और संस्थान के अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

कैफेटेरिया के समन्वयक प्रो. अमित त्यागी ने जानकारी दी कि यह पुनर्निर्माण संस्थान द्वारा छात्रों और स्टाफ के लिए बुनियादी सुविधाओं में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस नव-निर्मित कैफेटेरिया को आधुनिक सुविधाओं के साथ आरामदायक और उपयोगी बनाते हुए विभिन्न प्रकार के व्यंजन किफायती दरों पर उपलब्ध कराए गए हैं, जो छात्रों, शोधार्थियों और कर्मचारियों की विविध आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि इस कैफेटेरिया की एक विशेषता यह है कि इसमें ‘रीडिंग कॉर्नर’ नामक एक विशेष स्थान विकसित किया गया है, जिसमें प्रेरणादायक और आत्म-विकास पर केंद्रित पुस्तकें उपलब्ध हैं। छात्र इस कोने में पुस्तक दान करके साझा अध्ययन और व्यक्तिगत विकास की संस्कृति को प्रोत्साहित कर सकते हैं।

इस अवसर पर निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि “यह नव-निर्मित कैफेटेरिया केवल भोजन का स्थान नहीं है, बल्कि यह परस्पर संवाद, विचारों के आदान-प्रदान और सामुदायिक भावना को मजबूत करने का केंद्र बनेगा। इस प्रकार की साझा सुविधाएं हमारे परिसर की अकादमिक और सांस्कृतिक जीवंतता को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

आधुनिक सुविधाओं और सौहार्द्रपूर्ण वातावरण के साथ यह कैफेटेरिया छात्रों, शोधार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए एक ऐसा स्थान बन जाएगा, जहां वे न केवल विश्राम कर सकें, बल्कि एक-दूसरे से जुड़कर विचारों का आदान-प्रदान कर सकें—इस प्रकार आईआईटी (बीएचयू) परिवार की भावना को और अधिक सशक्त बनाएगा।

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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