Gajab Raat Review: बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी की नई क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘गजब रात’ 23 अक्टूबर 2026 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है। फिल्म में मनोज बाजपेयी एक ऐसे पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं जो भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है। लेकिन एक रात ऐसा मामला सामने आता है जो उसकी जिंदगी और सोच दोनों को बदलने लगता है। फिल्म की शुरुआत रहस्य और रोमांच के साथ होती है लेकिन कहानी आगे बढ़ने के साथ कई सवाल खड़े होने लगते हैं। दमदार अभिनय के बावजूद फिल्म अपनी उलझी हुई साजिश और कमजोर क्लाइमेक्स के कारण उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाती।
Gajab Raat Review : क्या है ‘गजब रात’ की कहानी?
फिल्म की कहानी दिल्ली में एक रात के दौरान घटने वाली घटनाओं पर आधारित है। मनोज बाजपेयी ने सब-इंस्पेक्टर अजय निर्वित का किरदार निभाया है। अजय एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी है जो अपनी ड्यूटी से ज्यादा रिश्वत और निजी फायदे को महत्व देता है।
कहानी में उस समय नया मोड़ आता है जब एक गंभीर रूप से घायल युवती को चलती कार से सड़क पर फेंक दिया जाता है। पुलिस इस मामले की जांच शुरू करती है और अजय को इसकी जिम्मेदारी मिलती है। लेकिन मामला इतना सीधा नहीं होता जितना शुरुआत में दिखाई देता है।
कुछ ही समय बाद एक व्यक्ति खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर जांच अपने हाथ में लेने की कोशिश करता है। इसके बाद एनआईए से जुड़ा एक अधिकारी भी मामले में दिलचस्पी दिखाने लगता है। अलग-अलग एजेंसियों के अधिकारियों की मौजूदगी और उनके संदिग्ध व्यवहार से अजय को शक होने लगता है कि घायल युवती के पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी हुई है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है वैसे-वैसे कहानी में नए किरदार और नए रहस्य सामने आते हैं। मामला केवल एक घायल महिला की पहचान तक सीमित नहीं रहता बल्कि भ्रष्टाचार और ताकतवर लोगों से जुड़े घटनाक्रम की ओर बढ़ने लगता है।
Gajab Raat Review : मनोज बाजपेयी ने फिर दिखाया अभिनय का दम
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत मनोज बाजपेयी का अभिनय है। उन्होंने अजय निर्वित के किरदार को सहजता और बारीकी के साथ निभाया है। उनका किरदार न तो पूरी तरह सकारात्मक है और न ही पारंपरिक खलनायक जैसा। वह अपने फायदे के लिए नियमों को तोड़ता है लेकिन परिस्थितियां उसे अपने फैसलों पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर करती हैं।
मनोज बाजपेयी अपने हावभाव और संवादों के जरिए किरदार की चालाकी और उसके भीतर चल रहे द्वंद्व को सामने लाते हैं। यही वजह है कि कहानी में कमजोरियां होने के बावजूद दर्शकों की दिलचस्पी काफी हद तक उनके किरदार में बनी रहती है।
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फिल्म में भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के बदलते रवैये को दिखाने की कोशिश की गई है। हालांकि कहानी में उसके बदलाव को जिस तरह पेश किया गया है वह पूरी तरह प्रभावशाली नहीं बन पाता।
Gajab Raat Review : सहायक कलाकारों को नहीं मिला पूरा मौका
फिल्म में अक्षय ओबेरॉय सीबीआई अधिकारी की भूमिका में हैं जबकि साकिब सलीम एनआईए अधिकारी के किरदार में नजर आते हैं। दिव्या दत्ता और श्रद्धा दास भी अहम भूमिकाओं में हैं। नुसरत भरूचा और कीकू शारदा सहित कई कलाकार फिल्म का हिस्सा हैं।
कलाकारों की यह टीम कहानी को मजबूत बनाने की क्षमता रखती है लेकिन कई किरदारों को पर्याप्त विस्तार नहीं मिल पाता। कुछ पात्र केवल कहानी को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होते दिखाई देते हैं। इससे फिल्म में मौजूद संभावनाओं का पूरा फायदा नहीं उठाया जा सका।

Gajab Raat Review : कहां कमजोर पड़ती है फिल्म?
‘गजब रात’ की शुरुआत दिलचस्प है। घायल युवती की पहचान और अलग-अलग जांच एजेंसियों की भूमिका दर्शकों के मन में सवाल पैदा करती है। फिल्म में कुछ ऐसे मोड़ भी आते हैं जो कहानी को आगे देखने की उत्सुकता बनाए रखते हैं।
हालांकि दूसरे हिस्से में पटकथा की कमजोरियां उभरने लगती हैं। कई घटनाओं का अनुमान पहले ही लगाया जा सकता है और साजिश की परतें खुलने के बावजूद अपेक्षित रोमांच पैदा नहीं हो पाता। फिल्म जिस बड़े रहस्य की ओर बढ़ती है उसका खुलासा भी उतना प्रभावशाली नहीं लगता।
क्लाइमेक्स में कहानी को जिस तरह समेटा गया है वह भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। एक भ्रष्ट अधिकारी के अचानक सही रास्ता चुनने के पीछे की वजहों को और गहराई से दिखाया जा सकता था। यही कमी फिल्म के भावनात्मक प्रभाव को कमजोर करती है।
फिल्म में भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। ये विषय महत्वपूर्ण हैं लेकिन कहानी में कई बार इन्हें जिस तरह जोड़ा गया है वह स्वाभाविक लगने के बजाय जरूरत से ज्यादा नाटकीय महसूस होता है।
Gajab Raat Review : निर्देशन और पटकथा कैसी है?
फिल्म का निर्देशन रितेश शाह ने किया है जबकि नीरज पांडे भी इसकी लेखन प्रक्रिया से जुड़े हैं। कहानी का एक रात के भीतर आगे बढ़ना फिल्म को तेज रफ्तार देने का अच्छा आधार बनता है। शुरुआत में यह प्रयोग प्रभावी भी लगता है।
लेकिन केवल तेज रफ्तार कहानी को शानदार थ्रिलर नहीं बना सकती। इसके लिए रहस्य का मजबूत निर्माण और घटनाओं का विश्वसनीय होना भी जरूरी है। ‘गजब रात’ में कई जगह यही संतुलन बिगड़ता दिखाई देता है। कहानी में किरदारों और साजिश की परतें बढ़ती जाती हैं लेकिन उनका प्रभाव हर बार उतना मजबूत नहीं बनता।
Gajab Raat Review : देखें या नहीं?
अगर आप मनोज बाजपेयी के अभिनय के प्रशंसक हैं और क्राइम थ्रिलर देखना पसंद करते हैं तो ‘गजब रात’ को एक बार देख सकते हैं। फिल्म में कुछ दिलचस्प पल हैं और मनोज बाजपेयी का अभिनय इसे संभालने की कोशिश करता है।
हालांकि अगर आप बेहद मजबूत पटकथा और चौंका देने वाले सस्पेंस की उम्मीद कर रहे हैं तो फिल्म आपको निराश कर सकती है। इसकी कहानी अच्छी शुरुआत के बाद अपनी ही साजिश में उलझती नजर आती है।
कुल मिलाकर: ‘गजब रात’ एक ऐसी क्राइम थ्रिलर है जिसके पास अच्छा विषय और प्रतिभाशाली कलाकार हैं लेकिन कमजोर पड़ती पटकथा और औसत क्लाइमेक्स इसे यादगार फिल्म बनने से रोक देते हैं।
Author: Suryodaya Samachar
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