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“”प्रेम का बदलता रूप””…

जनरलिस्ट शिवानी गुप्ता

“”प्रेम का बदलता रूप”” :- “ प्रेम-“” यानि,- प्यार ये कितना खूबसूरत शब्द हैं |जिसमें सारा संसार सिमट जाता है| जिसकी वज़ह से कभी किसी इंसान को जीने कि वज़ह मिल जाया करती थी | मरते इंसान को जीने कि रोशनी मिल जाती थी| पर अब इस कलियुग में यही प्यार दुःख दर्द यहाँ तक कि किसी इंसान कि मौत का कारण भी बन जाता है |बड़ा अजीब है…. आधुनिक समय का प्यार जो समय देख कर हर पल बदल जाया करता है| आजकल प्यार कि परिभाषा दिन प्रतिदिन बदलती जा रही| आज का प्यार ,-“”प्यार नहीं ब्लकि व्यापार बन गया है”””” लोग जैसे रोज कपड़े बदलते हैं ऐसे ही उनका प्यार भी समय के साथ बदल जाता है |पहले प्यार पूजा होती है| आज के समय का प्यार स्वार्थी बन गया है |जहां स्वार्थ दिखता है वहाँ प्यार पनपता है| जबकि पहले के समय में रिश्ता कोई भी हो प्यार हर रिश्ते का आधार हुआ करता था |निस्वार्थ भावना लिये प्यार हुआ करता था| आज ना वैसे लोग ना वैसे प्यार| हर रिश्ते में हो रही तकरार|

“”—क्या ऐसे होगा नव भारत का निर्माण ?जहाँ केवल स्वार्थी बन कर रह गया इंसान ….

“”-जब इंसान अनपढ था तब गली गली प्यार बरसता था| आज जब सभी पढ़े लिखे इंसान है तो निस्वार्थ भाव वाले प्यार के लिए इंसान तरसता है |ये समाज किस ओर भटकता है….

 

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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