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Ahraura Dam Flood :- अहरौरा बांध बारिश में क्यों बन जाता है बाढ़ का कारण? तकनीकी सुधार की उठी मांग

सिंचाई के लिए बनाए गए बांध से बरसात में निचले इलाकों में बढ़ता है खतरा, गेट खोलने पर चकिया-अहरौरा मार्ग भी होता है प्रभावित

Ahraura Dam Flood :- कभी सूखे और पथरीली जमीन से जूझने वाले इस क्षेत्र के किसानों के लिए अहरौरा बांध सिंचाई की बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया था। लेकिन भारी बारिश के दौरान यही बांध निचले इलाकों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। जलस्तर बढ़ने पर एक साथ कई फाटक खोलने की जरूरत पड़ती है, जिससे गड़ई नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है और आसपास के गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

हाल के दिनों में भी भारी बारिश के दौरान अहरौरा बांध के कई गेट खोले गए। सितंबर की शुरुआत में बांध से पानी छोड़े जाने के बाद चकिया-अहरौरा मार्ग पर आवागमन प्रभावित हुआ था।

Ahraura Dam Flood : सिंचाई की समस्या दूर करने के लिए बना था बांध

क्षेत्रीय इतिहास के अनुसार आजादी के बाद अहरौरा और आसपास का इलाका सूखे की समस्या से जूझता था। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण बरसात का पानी तेजी से बह जाता था और खेतों में पर्याप्त पानी नहीं टिक पाता था। किसानों ने पथरीली और बंजर जमीन को मेहनत से खेती योग्य बनाया, लेकिन सिंचाई सबसे बड़ी चुनौती बनी रही।

इसी समस्या को देखते हुए वर्ष 1954 में अहरौरा बांध का निर्माण कराया गया। बांध में पानी की निकासी के लिए फाटकों और सुलूस की व्यवस्था की गई। इससे आसपास के अनेक गांवों की खेती को सिंचाई का सहारा मिला।

अहरौरा बांध की अधिकतम जल क्षमता 360 फीट बताई जाती है। हाल के वर्षों में बारिश के दौरान जलस्तर बढ़ने पर कई बार गेट खोलकर पानी की निकासी करनी पड़ी है।

Ahraura Dam Flood धीरे-धीरे पानी निकालने से रहता है संतुलन

बांध का जलस्तर नियंत्रित रखने के लिए सामान्य स्थिति में कम मात्रा में पानी छोड़ा जाता है। इससे सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहता है और नीचे के इलाकों में अचानक पानी बढ़ने का खतरा भी कम रहता है।

लेकिन जब लगातार बारिश से बांध में पानी तेजी से बढ़ता है और जलस्तर अधिकतम क्षमता के करीब पहुंचने लगता है, तब सुरक्षा की दृष्टि से कई फाटक खोलने पड़ते हैं। अगस्त के अंत और सितंबर की शुरुआत में ऐसी स्थिति सामने आई, जब अहरौरा बांध से सैकड़ों से लेकर हजारों क्यूसेक प्रति सेकेंड पानी छोड़ा गया।

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Ahraura Dam Flood कई गांव और चकिया-अहरौरा मार्ग प्रभावित

बांध से अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने पर गड़ई नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। इसका असर नदी के किनारे बसे निचले गांवों पर पड़ता है। कई बार चकिया-अहरौरा मार्ग पर बने पुल के ऊपर से भी पानी बहने लगता है, जिससे आवागमन रोकना पड़ता है। सितंबर की शुरुआत में भी पानी कम होने के बाद इस मार्ग पर आवागमन दोबारा शुरू हुआ था।

हसौली क्षेत्र में हाल में बांध से पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ का पानी सहकारी समिति के भवन तक पहुंचने की रिपोर्ट भी सामने आई।

Ahraura Dam Flood : किसानों के लिए सिंचाई और बाढ़ दोनों चुनौती

अहरौरा बांध से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसे किसानों की सिंचाई की जरूरत के लिए पानी भी सुरक्षित रखना है और भारी बारिश के समय बांध को सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त पानी की निकासी भी करनी है।

यदि पानी को नियंत्रित तरीके से धीरे-धीरे निकाला जाए तो नीचे के क्षेत्रों में अचानक बाढ़ का खतरा कम किया जा सकता है। लेकिन अत्यधिक बारिश में जलस्तर तेजी से बढ़ने पर विभाग को एक साथ कई गेट खोलने पड़ सकते हैं।

Ahraura Dam Flood : तकनीकी सुधार की मांग

क्षेत्रीय किसानों और किसान संगठनों का कहना है कि अहरौरा बांध की व्यवस्था में तकनीकी सुधार की जरूरत है। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे बरसात में अतिरिक्त पानी की सुरक्षित और नियंत्रित निकासी हो सके तथा किसानों के लिए सिंचाई का पानी भी सुरक्षित रहे।

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बांध से जुड़े जल निकासी तंत्र और स्लूस गेट को लेकर पहले भी समस्याएं सामने आ चुकी हैं। अगस्त 2026 में मेन कैनाल के स्लूस गेट की मरम्मत पूरी होने की जानकारी भी सामने आई थी।

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह, प्रदेश महासचिव प्रह्लाद सिंह और डोगिया कैनाल अहरौरा के अध्यक्ष आत्मा प्रसाद त्रिपाठी ने बांध की तकनीकी व्यवस्था में सुधार और आवश्यक मरम्मत की मांग का समर्थन किया है।

किसानों का कहना है कि बांध का उद्देश्य सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। इसलिए ऐसी स्थायी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे बरसात में बांध बाढ़ का कारण न बने और सामान्य मौसम में किसानों की सिंचाई भी प्रभावित न हो।

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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