Aata :- ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच चल रही जंग (2026) ने देश की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने, तेल की कीमतों में उछाल और उर्वरक (fertilizer) की सप्लाई बाधित होने से न सिर्फ ईरान बल्कि वैश्विक खाद्य कीमतें भी बढ़ रही हैं।
UN FAO रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में ग्लोबल फूड प्राइस इंडेक्स 2.4% बढ़ गया, जिसमें गेहूं की कीमतों में 4.3% की तेजी आई। अगर जंग लंबी चली तो खाद्य महंगाई और बढ़ने की आशंका है।9c205d
ईरान में लोकल स्तर पर स्थिति और भी गंभीर है।
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक:
1 किलो आटा (Wheat Flour): 72,000 से 1,93,000 ईरानी रियाल तक (बड़े शहरों जैसे तेहरान में ऊपरी रेंज ज्यादा)। कुछ सोशल मीडिया और न्यूज रिपोर्ट्स में 5.2 लाख रियाल प्रति किलो तक का जिक्र है, जो महंगाई और ब्लैक मार्केटिंग के कारण हो सकता है।0de3d3
मटन (Mutton): कीमतें पहले से ही ऊंची थीं और जंग के बाद और बढ़ गई हैं।
रुपये में कन्वर्ट करके देखें (वर्तमान एक्सचेंज रेट: लगभग 1 IRR ≈ ₹0.00007):
72,000 रियाल ≈ ₹5
1,93,000 रियाल ≈ ₹13.5
5.2 लाख रियाल ≈ ₹36 (कुछ रिपोर्ट्स में ऊंचा दावा)
नोट: ईरानी रियाल बहुत कम मूल्य का है, इसलिए आंकड़े बड़े नजर आते हैं लेकिन वास्तविक खरीद क्षमता कम हो गई है। 1 करोड़ रियाल (लगभग ₹700-715) में अब पहले जितनी खरीदारी नहीं हो पाती। लोग परिवार के लिए आटा-रोटी खरीदने में भी परेशान हैं।
ईरान में पहले से ही उच्च मुद्रास्फीति (inflation) थी, अब जंग ने ऊर्जा, परिवहन और आयात को महंगा कर दिया है। गरीब और ग्रामीण परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। मटन, चिकन, दूध, चावल जैसी चीजों के दाम भी तेजी से बढ़े हैं।
वैश्विक स्तर पर भी असर: भारत समेत कई देशों में अप्रत्यक्ष रूप से खाद्य कीमतें प्रभावित हो सकती हैं, हालांकि भारत के पास पर्याप्त स्टॉक है।
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Author: Suryodaya Samachar
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