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Shani pradosh vrat 2024 : शनि प्रदोष व्रत पर किस भगवान की करें पूजा, पूजन विधि…

शनि प्रदोष व्रत : भगवान शिव की आराधना का विशेष पर्व होता है। यह व्रत प्रत्येक माह के त्रयोदशी तिथि को किया जाता है और जब यह व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा की जाती है, लेकिन साथ ही शनिदेव की भी पूजा की जाती है, क्योंकि शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित होता है। शनि प्रदोष का व्रत जो भी रखता है। वह सदैव निरोग रहता है और दीर्घायु होता है। यदि राजा इसका व्रत करता है तो राजा का राजकोष हमेशा भरा पूरा रहता है। 31 अगस्त 2024 को शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा।

शनि प्रदोष व्रत की पूजन विधि:

1. व्रत का संकल्प : सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण करें। भगवान शिव और शनिदेव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।

2. पूजा की तैयारी : पूजन स्थल को साफ करें और वहां पर भगवान शिव एवं शनिदेव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

3. पूजा सामग्री : पूजा के लिए जल, अक्षत, पुष्प, चंदन, धूप, दीप, फल, बेलपत्र, धतूरा और शमी के पत्ते की आवश्यकता होती है।

4. भगवान शिव की पूजा : शाम के समय सूर्यास्त के बाद भगवान शिव का अभिषेक जल, दूध और शहद से करें। इसके बाद चंदन, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित करें। भगवान शिव की आरती करें और उनकी कथा का पाठ करें।

5. शनिदेव की पूजा : शनिदेव को तेल, काले तिल, काले वस्त्र, और नीले पुष्प अर्पित करें। शनिदेव का ध्यान करें और उनकी स्तुति करें। उनके मंत्र “ॐ शनैश्चराय नमः” का जाप करें।

6. उपवास : दिनभर निराहार या फलाहार रहें और भगवान शिव का ध्यान करते रहें। रात को भी जागरण का महत्व है।

7. प्रसाद वितरण : अगले दिन सुबह स्नान के बाद पूजा करें और व्रत का पारण करें। ब्राह्मणों को भोजन कराकर, दान-दक्षिणा देकर व्रत समाप्त करें।

शनि प्रदोष व्रत का फल:

इस व्रत से भगवान शिव और शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और कष्टों से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से शनिदेव के कोप से बचने के लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

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Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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