Vindhya Expressway Mirzapur :- प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे के मीरजापुर जिले से होकर गुजरने की योजना के बीच इसके दायरे में आने वाले गांवों के किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों को अपनी जमीन जाने के साथ-साथ उचित मुआवजा मिलने और जमीन के राजस्व अभिलेखों में दर्ज स्थिति को लेकर भी आशंकाएं हैं।
विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना को प्रयागराज से मीरजापुर और सोनभद्र होते हुए आगे छत्तीसगढ़ से जोड़ने की योजना के रूप में देखा जा रहा है। हाल के दिनों में परियोजना के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया को लेकर प्रयागराज और सोनभद्र में भी किसानों की ओर से मुआवजे तथा भूमि अधिग्रहण को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
Vindhya Expressway Mirzapur मीरजापुर के कई गांव परियोजना की जद में
बताया गया है कि मीरजापुर क्षेत्र में देवरी, नुआंव, चौकियां, बरबकपुर, कुदारन, हटियां, सोनखरां, रजौली, शेखवां, मानिकपुर, पट्टीकलां और हिनौता समेत कई गांव परियोजना के संभावित दायरे में आ रहे हैं। जिले के मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों से एक्सप्रेसवे के गुजरने की बात सामने आ रही है।
परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में आवागमन को आसान बनाना, यात्रा का समय कम करना और प्रमुख इलाकों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करना है।
Vindhya Expressway Mirzapur पहाड़ी क्षेत्र के किसानों की अलग चिंता
खासकर शेखवां, मानिकपुर, पट्टीकलां और हिनौता जैसे पहाड़ी क्षेत्र के किसानों का कहना है कि उनकी जमीनें परियोजना की जद में आने पर उनके सामने बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।
किसानों के अनुसार, कई लोग लंबे समय से जमीन पर कब्जे के आधार पर खेती कर रहे हैं और उनके पास खतौनी भी है, लेकिन राजस्व अभिलेखों में जमीन की प्रकृति कहीं नाला या पहाड़ के रूप में दर्ज होने के कारण मुआवजे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे किसानों को जमीन से बेदखली का डर भी सता रहा है।
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Vindhya Expressway Mirzapur सरकारी मुआवजा और बाजार मूल्य में अंतर का दावा
किसानों का सबसे बड़ा सवाल मुआवजे की दर को लेकर है। उनका दावा है कि पहाड़ी क्षेत्र में जमीन का सरकारी मुआवजा करीब 7 लाख रुपये प्रति एकड़ बताया जा रहा है, जबकि निजी स्तर पर उसी क्षेत्र की जमीन की कीमत करीब 30 से 40 लाख रुपये प्रति एकड़ तक बताई जा रही है।
किसानों का कहना है कि यदि जमीन बाजार मूल्य से काफी कम दर पर चली जाती है तो इससे खेती पर निर्भर परिवारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। हाल में सोनभद्र में भी विंध्य एक्सप्रेसवे से प्रभावित किसानों ने भूमि का मुआवजा बाजार मूल्य के आधार पर तय करने की मांग उठाई है।
Vindhya Expressway Mirzapur किसानों को रोजी-रोटी छिनने का डर
किसान शारदा पाल, गनेश पाल, कमला चौहान, विजयी और दुलारे समेत अन्य ग्रामीणों का कहना है कि एक्सप्रेसवे क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इसकी कीमत किसानों की आजीविका की कीमत पर नहीं चुकाई जानी चाहिए।
किसानों के मुताबिक खेती-किसानी से किसी तरह परिवार का गुजारा चल रहा है। जमीन चली गई और पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला तो उनके सामने भविष्य में रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।
बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजे की मांग Vindhya Expressway Mirzapur
किसानों की मांग है कि जमीन लेने से पहले प्रत्येक भूखंड और उससे जुड़ी परिसंपत्तियों का निष्पक्ष मूल्यांकन कराया जाए तथा प्रभावित परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित मुआवजा निर्धारित किया जाए। सोनभद्र में भी किसानों ने भूमि और परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता तथा बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजे की मांग की है।
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नोट: किसानों द्वारा बताई गई मुआवजे की दरें और निजी बाजार की कीमतें स्थानीय किसानों के दावे के रूप में दी गई हैं; अंतिम मुआवजा संबंधित सरकारी प्रक्रिया और भूमि अभिलेखों के आधार पर निर्धारित होगा।
Author: Suryodaya Samachar
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