Dharmendra Pradhan resigned today :- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि युवाओं की भावनाओं का सम्मान करना सबसे जरूरी है और इसी कारण उन्होंने यह निर्णय लिया है।
क्या कहा धर्मेंद्र प्रधान ने
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पोस्ट में लिखा कि पिछले 4 साल में शिक्षा मंत्रालय में काम करने का अवसर मिला। नई शिक्षा नीति 2020 को जमीन पर उतारने स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों में सुधार करने और युवाओं को कौशल से जोड़ने का प्रयास किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार जताया। साथ ही लिखा कि देश के युवाओं की आकांक्षाओं को देखते हुए उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने का फैसला किया है।
इस्तीफे के पीछे की वजह
सूत्रों के अनुसार हाल के समय में NEET और NET पेपर लीक के मुद्दों को लेकर छात्रों में नाराजगी थी। विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्रालय पर सवाल उठा रहा था। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पोस्ट में सीधे किसी घटना का जिक्र नहीं किया लेकिन युवाओं की भावनाओं का सम्मान शब्द से संकेत दिया कि वह छात्रों के विरोध को गंभीरता से ले रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में हलचल
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि कैबिनेट में जल्द फेरबदल हो सकता है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता भी धर्मेंद्र प्रधान के फैसले को नैतिक कदम बता रहे हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने कहा कि यह सरकार की नाकामी की स्वीकारोक्ति है।
कौन संभालेगा जिम्मा
अभी यह साफ नहीं है कि शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार किसे दिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय इस पर जल्द फैसला लेगा। धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा से राज्यसभा सांसद हैं और पहले पेट्रोलियम और कौशल विकास मंत्रालय भी संभाल चुके हैं।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद देशभर के छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया भी सामने आ रही है। कुछ छात्र इसे सही कदम बता रहे हैं तो कुछ इसे सिर्फ प्रतीकात्मक बता रहे हैं।
1. युवाओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए इस्तीफा दिया।
2. परीक्षा प्रणाली पर उठे सवालों की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की।
3. NEET और अन्य परीक्षा विवादों के बाद छात्रों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए फैसला लिया।
4. शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के उद्देश्य से पद छोड़ा।
5. सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया।
6. देशभर में छात्र संगठनों के लगातार विरोध-प्रदर्शन को गंभीरता से लिया।
7. निष्पक्ष जांच और शिक्षा सुधार का रास्ता आसान बनाने के लिए पद छोड़ा।
8. अपने संदेश में कहा कि छात्रों का भविष्य किसी भी पद से बड़ा है।
9. विवादों से सरकार का ध्यान शिक्षा सुधार से न भटके, इसलिए इस्तीफा दिया।
10. कहा कि वे देश और युवाओं के हित में आगे भी काम करते रहेंगे, भले ही मंत्री पद पर न रहें।
Author: Suryodaya Samachar
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