Kashi Rath Yatra Mela 2026 :- धर्म और आस्था की नगरी काशी में भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा और उससे जुड़ा लक्खा मेला इस वर्ष 16, 17 और 18 जुलाई को आयोजित होगा। करीब दो शताब्दियों से अधिक पुराने इस धार्मिक आयोजन से काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा जुड़ी हुई है। वहीं वर्ष 1890 से रथयात्रा मेले का स्वरूप लगातार कायम है और आज भी यह लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के विशेष स्नान के बाद भगवान 15 दिनों तक अस्वस्थ रहते हैं। इस दौरान उन्हें परवल का जूस और परवल से बने विशेष व्यंजनों का भोग अर्पित किया जाता है। अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद भगवान स्वस्थ होकर भक्तों को दर्शन देते हैं।
15 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य पालकी यात्रा के साथ अस्सी स्थित मंदिर से नगर भ्रमण करते हुए रथयात्रा स्थित बेनीराम बाग पहुंचेंगे। इसके साथ ही काशी के प्रसिद्ध रथयात्रा मेले का शुभारंभ हो जाएगा। अगले तीन दिनों तक रथयात्रा क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी।
मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के रथ के पहिए का स्पर्श करने और श्रद्धापूर्वक रथ खींचने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि हर वर्ष हजारों श्रद्धालु रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त करने के लिए उत्साहित रहते हैं। भगवान को तुलसी दल की माला, नानखटाई और प्रसिद्ध जगन्नाथी पान अर्पित करने की भी विशेष परंपरा है।
काशीवासियों के लिए रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि तीज-त्योहारों के शुभारंभ का प्रतीक भी है। तीन दिवसीय इस ऐतिहासिक मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धा, भक्ति और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
Author: Suryodaya Samachar
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