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Guru Purnima 2025: जानिए क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा और कौन थे वेदव्यास?

Guru Purnima 2025 :- इस वर्ष गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व 10 जुलाई 2025, गुरुवार को बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाएगा। यह पर्व प्रतिवर्ष आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को आता है। बहुत लोग इसे श्रद्धा से मनाते हैं, लेकिन इसके पीछे की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मान्यताओं को कम ही लोग जानते हैं।

🔱 गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा

हिंदू परंपरा में गुरु को परमेश्वर से भी उच्च स्थान प्राप्त है। कहा गया है कि गुरु ही जीवन की अज्ञानता रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश देते हैं। इस दिन शिष्य अपने गुरु का पूजन कर आशीर्वाद लेते हैं। इस बार की गुरु पूर्णिमा भी इसी कड़ी में श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी।

 

📜 गुरु पूर्णिमा क्यों मनाते हैं?

धार्मिक शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। इसी वजह से यह दिन “गुरु पूर्णिमा” के रूप में जाना जाता है। महर्षि वेदव्यास ने वेदों का विभाजन किया, महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना की और कई उपनिषदों व पुराणों की रचना में योगदान दिया।

भविष्योत्तर पुराण में वेदव्यास जी स्वयं कहते हैं:

> “मम जन्मदिने सम्यक् पूजनीयः प्रयत्नतः।
आषाढ़ शुक्ल पक्षे तु पूर्णिमायां गुरौ तथा।।
पूजनीयः विशेषेण वस्त्राभरणधेनुभिः।
फलपुष्पादिना सम्यग् रत्नकाञ्चन भोजनैः।।”

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इसका अर्थ है कि आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को मेरा जन्मदिन है। इस दिन गुरु की विधिवत पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने पर गुरु में भगवान के ही दर्शन होते हैं।

 

🙏 महर्षि वेदव्यास कौन थे?

महर्षि वेदव्यास, जिनका पूरा नाम कृष्णद्वैपायन था, ऋषि पाराशर और माता सत्यवती के पुत्र थे। वे भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से एक माने जाते हैं। काले वर्ण के कारण उन्हें ‘कृष्ण’ और द्वीप पर जन्म लेने के कारण ‘द्वैपायन’ कहा गया।

उन्होंने ही वेदों को चार भागों में विभाजित किया, इसीलिए वे “वेदव्यास” कहलाए। साथ ही महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना कर उन्होंने मानव सभ्यता को अमूल्य ज्ञान दिया।

 

🔮 क्या आज भी जीवित हैं वेदव्यास जी?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि वेदव्यास आज भी जीवित हैं। उन्हें अष्ट चिरंजीवियों में गिना जाता है। उनके प्रमुख शिष्यों में पैल, जैमिनि, वैशम्पायन, सुमंत और रोमहर्षण शामिल हैं। इन्होंने ही वेदों को आगे विभाजित कर उपनिषदों का स्वरूप दिया। महर्षि वैशम्पायन ने परीक्षित की सभा में महाभारत की कथा सुनाई थी।

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Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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