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शिवहर:- “रजिस्ट्री नहीं, रिश्वत का सौदा!” — पूर्व विधायक ठाकुर रत्नाकर राणा का बड़ा आरोप

शिवहर (बिहार) —[शिवहर से मोहम्मद दानिश खान की स्पेशल रिपोर्ट] एक ओर बिहार सरकार “सुशासन” और पारदर्शिता की बात कर रही है, वहीं ज़मीनी हकीकत सरकार की छवि को सवालों के कठघरे में ला खड़ा करती है। ताज़ा मामला शिवहर जिला अवर निबंधन कार्यालय से जुड़ा है, जिसे पूर्व विधायक ठाकुर रत्नाकर राणा ने “धन उगाही का अड्डा” करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यहां ज़मीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया अब भ्रष्टाचार की गिरवी बन चुकी है, जहां बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता।

“यहां ज़मीन का नहीं, ज़मीर का सौदा होता है”

अपने बयान में पूर्व विधायक राणा ने कहा कि यह कार्यालय अब ज़मीन खरीदने-बेचने वालों के लिए पीड़ा का केंद्र बन चुका है। लोगों को एक-एक दस्तावेज़ के लिए चक्कर लगवाए जाते हैं और हर स्तर पर “कमिशन” की मांग की जाती है। “यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि आम नागरिक के आत्मसम्मान का अपमान भी है,” उन्होंने कहा।

गाढ़ी कमाई के बदले अपमान

राणा का कहना है कि एक आम नागरिक वर्षों की मेहनत और गाढ़ी कमाई से ज़मीन खरीदता है। लेकिन जब वह रजिस्ट्री कराने पहुंचता है, तो उसे कागजों की वैधता, जमीन की किस्म, माप-नाप, और क्लियरेंस जैसे मुद्दों पर परेशान किया जाता है — और फिर शुरू होती है खुली उगाही। “इस प्रक्रिया में रजिस्ट्री कम, शोषण ज्यादा होता है,” उन्होंने कहा।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

पूर्व विधायक ने जिला प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा बार-बार उठाए जाने के बावजूद न तो कोई ठोस कार्रवाई की गई, और न ही कोई जांच बैठाई गई। इससे यह संदेह और गहराता है कि कहीं जिम्मेदार अधिकारी खुद इस गोरखधंधे में साझेदार तो नहीं?

जनता को चाहिए जवाब, नहीं तो बढ़ेगा असंतोष

राणा ने स्पष्ट तौर पर कहा कि अगर समय रहते इस भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए गए तो शिवहर की जनता में असंतोष की लहर तेज़ होगी। “क्या अब जनता को हर अपने अधिकार के लिए ‘न्याय की बोली’ लगानी पड़ेगी?” उन्होंने पूछा।

जिला पदाधिकारी से की सख्त कार्रवाई की मांग

पूर्व विधायक ने जिला पदाधिकारी से इस बयान का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक निष्पक्ष जांच के ज़रिए दोषियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। “शिवहर की जनता जवाब चाहती है — और देर हुई तो असंतोष इतना बढ़ेगा कि उसे संभालना मुश्किल हो जाएगा,” उन्होंने चेतावनी दी।

निष्कर्ष

शिवहर का रजिस्ट्री कार्यालय भ्रष्टाचार की दलदल में कितना गहरा धंसा है, यह पूर्व विधायक ठाकुर रत्नाकर राणा के बयान से स्पष्ट होता है। यह केवल एक कार्यालय की कहानी नहीं, बल्कि शासन और व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। अब देखना है कि जिला प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाता है — या फिर यह मामला भी ‘फाइलों’ में दफन होकर रह जाएगा।

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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