Chitrakoot big update :- उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के भरतकूप थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गोड़ा गांव में स्थित राजेंद्र शर्मा की पत्थर खदान में बुधवार को तेज़ धमाके के साथ ब्लास्टिंग की गई। इस हादसे में चार साल का एक मासूम बच्चा घायल हो गया। बताया जा रहा है कि 4/6 इंची ब्लास्टिंग की गई थी, जिसके चलते कई पत्थर घरों की छत फाड़ते हुए अंदर तक घुस आए। यह घटना न केवल बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी, बल्कि पूरे गांव के लिए खतरे की घंटी बनकर सामने आई।
प्रशासन की नाकामी उजागर
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। गांववासियों ने खनिज विभाग पर गंभीर आरोप लगाए कि लगातार शिकायतों के बावजूद भी अवैध ब्लास्टिंग पर कोई रोक नहीं लगाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन और खनिज विभाग ने खनन माफियाओं को खुली छूट दे रखी है, जिसके चलते गांव के लोग हमेशा खतरे में जी रहे हैं।
खनिज विभाग के अधिकारियों पर नाराज़गी
हादसे के बाद जब ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया और खनिज विभाग के इंस्पेक्टर मंटू सिंह की गाड़ी को रोका, तब माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। ग्रामीणों ने मौके पर खनिज अधिकारी सुधाकर सिंह की अनुपस्थिति पर भी नाराज़गी जताई। पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की गई, लेकिन लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ।
पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
यह कोई पहली बार नहीं है जब चित्रकूट में ब्लास्टिंग के चलते हादसा हुआ हो। इससे पहले भी एमपी के जयवासवल खदान में इसी तरह की घटना हो चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे यह साफ होता है कि खनन माफियाओं को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है।
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ग्रामीणों का विरोध और मांग
ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि गोड़ा गांव और आसपास के इलाकों में हो रही अवैध ब्लास्टिंग पर तुरंत रोक लगाई जाए। साथ ही, उन्होंने घायल मासूम के इलाज और मुआवज़े की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन ठोस कार्रवाई नहीं करता, वे विरोध जारी रखेंगे।
कब जागेगा प्रशासन?
चित्रकूट की यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि खनन माफियाओं पर प्रशासन का कोई अंकुश नहीं है। मासूमों की जान जोखिम में डालकर मुनाफा कमाना अब आम बात बन चुकी है। यदि समय रहते प्रशासन जागरूक नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में ऐसी घटनाएं और भी भयावह रूप ले सकती हैं।
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Author: Suryodaya Samachar
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