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आज है कामिका एकादशी जानिए महात्म्य , व्रत कथा व महामंत्र जिसके जाप से होगा व्रत पूर्ण……

कामिका एकादशी 2024 : भगवान कृष्ण बोले- हे युधिष्ठिर ! श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम कामिका है। इसका माहात्म्य लोक हितार्थ एक समय देवर्षि नारद ने भीष्म पितामह से पूछा उन्होने इस पवित्र व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की थी। पृथ्वी दान, स्वर्ण दान, कन्या दान इत्यादि महादान के फल से विष्णु पूजा का फल अधिक है। कामिका एकादशी के समान विष्णु पूजा का फल है, जो फल मनुष्य को अध्यात्म विद्या से मिलता है उससे अधिक फल कामिका एकादशी देने वाली है भगवान विष्णु पर एक दल तुलसी का चढ़ाओ तो एक भार स्वर्ण और चार भाग चाँदी दान करने का मिलेगा। बढ़िया वस्त्र अमूल्य भूषण पर भगवान इतने शीघ्र प्रसन्न नहीं होते हैं। तुलसी के दर्शन मात्र से पाप भस्म हो जाते हैं। वृंदा (तुलसी ) के स्पर्श मात्र से मनुष्य पवित्र हो जाता है भरत, चरणों में जो तुलसी अर्पण करता है उसे अवश्य मुक्ति मिलती है। इस माहात्म्य का सुनने से मनुष्य यशस्वी होता है।

फलाहार– इस दिन तुलसी की मंजरी से विष्णु भगवान का पूजन किया जाता है। इस दिन गौ दुग्ध का सागार लेना चाहिए।

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कामिका एकादशी व्रत कथा : प्राचीन समय की बात है  में एक गांव में पहलवान रहता था। वह दिल का बेहद अच्छा इंसान था, लेकिन वह स्वभाव से बहुत क्रोधी  व्यक्ति था इसलिए उसकी कभी-कभी किसी से बहस हो जाती थी। एक बार उसने ब्राह्मण से झगड़ा कर लिया। वह सामने वाले पर इतना क्रोधित हो गया कि उसने ब्राह्मण की हत्या कर दी, जिसकी वजह से पहलवान पर ब्राह्मण हत्या का दोष लग गया। इस दोष से बचाव और पश्चाताप के लिए उसके अंतिम संस्कार में शामिल होने से मना कर दिया गया ।

इसके बाद पंडितों ने ब्राह्मण की हत्या का दोषी मानकर उसे समाज से  बहिष्कार कर दिया। साथ ही ब्राह्मणों ने पहलवान के घर के सभी तरह के धार्मिक कार्य करने से इंकार कर दिया। इसके बाद पहलवान बहुत परेशान हो गया और उसने एक साधु से पूछा कि वह कैसे ब्राह्मण की हत्या के दोष से मुक्त हो सकता है? ऐसे में साधु ने सावन के माह में पड़ने वाली कामिका एकादशी व्रत करने की सलाह दी। पहलवान ने कामिका एकादशी व्रत का विधि विधान से पालन किया। भगवान कृष्ण की सेवा की । रात में भगवान का नाम जपते जपते वही उनके चरणों में सो गया । सपने में देखा है कि भगवान श्री हरि सपने में आकर उसके ब्राह्मण हत्या के दोष को खत्म कर दिया है ।

नियम: एकादशी का पालन हमें भगवान कृष्ण का यथासंभव जाप कर करना चाहिए यही हमें कलयुग से पार लगाएगा और भगवान के धाम पहुंचाएगा ।

महामंत्र: हरे कृष्णा , हरे कृष्ण ,कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।

          हरे राम,  हरे राम , राम राम  हरे हरे ।।

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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