Indian Share Market: Indian Share Market में लगातार सातवें सप्ताह गिरावट दर्ज हुई। शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी आई, लेकिन ऊंचे क्रूड ऑयल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, FPI बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता से बाजार पर दबाव बना रहा।
भारतीय शेयर बाजार में लगातार सातवें सप्ताह गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी देखने को मिली, लेकिन पूरे सप्ताह का नुकसान पूरी तरह खत्म नहीं हो सका। ऊंची क्रूड ऑयल कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने बाजार की धारणा पर दबाव बनाए रखा।
Indian Share Market: शुक्रवार को बाजार में लौटी खरीदारी
पिछले कारोबारी सत्र में तेज गिरावट के बाद शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार में कुछ सुधार आया। Sensex 315.20 अंक यानी 0.43% चढ़कर 73,895.74 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 में 77.40 अंक यानी 0.34% की बढ़त रही और यह 23,140.50 पर पहुंच गया।
हालांकि, एक दिन की तेजी सात सप्ताह से चली आ रही गिरावट का सिलसिला नहीं तोड़ सकी।
Indian Share Market: सातवें हफ्ते भी लाल निशान में रहे सेंसेक्स और निफ्टी
25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में Nifty 50 करीब 0.9% और Sensex लगभग 0.5% नीचे रहा। इस तरह दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगातार सातवें सप्ताह गिरावट दर्ज हुई। Reuters के मुताबिक यह भारतीय शेयर बाजार की छह साल में सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट की श्रृंखला है।
इससे पहले निफ्टी में लगातार सात या उससे ज्यादा साप्ताहिक गिरावट पिछले 25 वर्षों में केवल कुछ मौकों पर दर्ज हुई थी।
Indian Share Market: गुरुवार को आई थी तेज बिकवाली
सप्ताह के दौरान सबसे ज्यादा दबाव 24 सितंबर को दिखाई दिया। उस दिन Nifty 50 करीब 1.64% टूट गया, जो लगभग 10 सप्ताह में उसकी सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट रही। इसके बाद शुक्रवार को बाजार में वैल्यू बाइंग से कुछ सुधार आया।
Indian Share Market: बाजार पर किन वजहों का दबाव?
1. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें
क्रूड ऑयल महंगा रहने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए आयात बिल और महंगाई से जुड़ी चिंताएं बढ़ती हैं। बाजार में इसे मौजूदा कमजोरी की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है।
2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी से वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां सख्त हुई हैं। इससे उभरते बाजारों में निवेश की आकर्षकता प्रभावित हो सकती है।
3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली ने घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ाया। दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने इस दबाव को कुछ हद तक संतुलित किया।
4. वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता
मध्य-पूर्व से जुड़ी परिस्थितियों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क रखा है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार की धारणा पर भी पड़ा है।
Indian Share Market: IT और बैंकिंग शेयर भी दबाव में
सप्ताह के दौरान IT सेक्टर पर भी दबाव रहा। निवेशक अमेरिकी ब्याज दरों, मांग और कंपनियों की कमाई की संभावनाओं को लेकर सतर्क रहे। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली।
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Indian Share Market: निवेशकों के लिए क्या मायने?
लगातार सात सप्ताह की गिरावट बाजार में बढ़ी हुई अस्थिरता को दर्शाती है। हालांकि शुक्रवार की तेजी से यह भी पता चलता है कि कुछ स्तरों पर निवेशकों की खरीदारी वापस आई। आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों का रुख और वैश्विक घटनाक्रम बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
ध्यान दें: शेयर बाजार में तेजी या गिरावट के आधार पर किसी खास शेयर को खरीदने-बेचने का निर्णय नहीं लेना चाहिए। निवेश से पहले कंपनी के वित्तीय आंकड़ों और अपने जोखिम स्तर को ध्यान में रखना जरूरी है।
Author: Suryodaya Samachar
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