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कलियुग केवल नाम अधारा …. कलियुग में ऐसा क्या है जिससे जीव का कल्याण हो सकता है….।

*कलियुग केवल नाम अधारा*

*कलियुग केवल नाम अधारा । सुमिरि सुमिरि नर उतरहि पारा ।।*

गोस्वामी श्री तुलसीदास जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है –

*नहि कलि करम न भगति विवेकू। राम नाम अवलम्बन ऐकू ।।*

गोस्वामी जी कहते हैं कि इस कलियुग में कर्म (कर्म काण्ड), भक्ति (उपासना काण्ड) व विवेक (ज्ञान काण्ड) – ये तीनों नहीं सध पाते। केवल राम नाम का ही एकमात्र अवलम्बन है, सहारा है। राम नाम के सहारे ही जीव का कल्याण हो सकता है।

एक बार गिरनार की सिद्ध मण्डली आकाश मार्ग से श्री तुलसीदास जी का दर्शन व सत्संग का लाभ लेने आई। सिद्ध संतों ने श्री तुलसीदास जी से बड़ी विनम्रता पूर्वक पूछा- “इस घोर कलियुग में भी आपको माया व्याप्त नहीं होती ? आप कैसे इस माया से बचे हैं? इसका क्‍या कारण है ? यह योग का प्रभाव है या ज्ञान का या फिर भक्ति का?” श्री तुलसीदास जी ने उत्तर दिया

*योग न भक्ति न ज्ञान बल, केवल नाम अधार ।*
*मुनि उत्तर सुनि मुदित मन, सिद्ध गये गिर नार ।।*

हमें न योग, न भक्ति, और न ही ज्ञान का बल है। बल है तो केवल हरि नाम का। केवल हरि नाम जप के प्रभाव से ही यह सम्भव हुआ है। उत्तर सुनकर सिद्ध मण्डली बहुत ही आनन्दित हुई और अपना समाधान करा कर फिर वापिस गिरनार चली गई।

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Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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