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“सरकार की नीति-नियत पर उठते सवाल: जिम्मेदार कौन?”

वाराणसी (उत्तर प्रदेश):- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निरंतर जनहित में लिए जा रहे निर्णयों के बावजूद विपक्षी दल लगातार सवाल उठाते रहे हैं। चाहे बात कानून व्यवस्था की हो, शिक्षा सुधार की, या फिर यातायात व्यवस्था में बदलाव की—सरकार की हर नीति पर किसी न किसी बहाने से उंगली उठाई जाती है। यह आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा जरूर है, लेकिन जब यह सिर्फ सत्ता को बदनाम करने के उद्देश्य से की जाती है, तो इसका असर जनता के विश्वास पर पड़ता है।

हाल ही की बात करें तो वाराणसी शहर में यातायात को सुगम बनाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। नए आदेश के अनुसार कैंट रोडवेज पर प्राइवेट बसों के ठहराव और सवारी भरने पर प्रतिबंध लगाया गया। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यातायात जाम को कम करना और यात्रियों को सुव्यवस्थित सेवाएं प्रदान करना था।

लेकिन ground reality कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। सूत्रों के अनुसार, आज भी कई प्राइवेट बसें “उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम” के नाम का उपयोग कर कैंट रोडवेज पर सवारियां भर रही हैं। चाहे उनका अनुबंध समाप्त हो चुका हो, या उनकी सेवा वैध न हो—कुछ विशेष अधिकारियों की “मौन स्वीकृति” से ये कार्य बेरोकटोक जारी है। चंद रुपयों के लेन-देन में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

यहीं से विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल जाता है। वो सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि यह चूक अक्सर सरकारी तंत्र के कुछ कमजोर या भ्रष्ट अंगों से होती है। नीतियां जनहित की होती हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन जब निजी स्वार्थों से प्रभावित होता है, तो नीतियों की मूल भावना ही दब जाती है।

यह समय है कि उत्तर प्रदेश सरकार अपने ही सिस्टम में छिपे ऐसे तत्वों की पहचान करे और उन्हें जवाबदेह बनाए। जो अधिकारी या एजेंसियां सरकार की छवि को धूमिल करने में लगे हैं, उन पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। जनता को दिखना चाहिए कि सरकार की नीति और नीयत दोनों साफ हैं, और जो भी इसे नुकसान पहुंचाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन ही जनता का विश्वास जीत सकता है। जब तक निचले स्तर तक सिस्टम साफ और निष्पक्ष नहीं होगा, तब तक सरकार की सबसे अच्छी नीति भी संदेह के घेरे में आ सकती है।

सरकार को चाहिए कि वह न केवल विपक्ष की आलोचनाओं का उत्तर दे, बल्कि अपने भीतर की कमजोरियों को भी दूर करे। ताकि हर नीति का लाभ आमजन तक पहुंचे और समाज को एक सकारात्मक संदेश मिले।

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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