Varanasi News :- रथयात्रा महोत्सव के अंतिम दिन वाराणसी के ऐतिहासिक विष्णु अनादि तीर्थ और मणिकर्णिका चक्र पुष्करणी कुंड पर विशेष स्वच्छता और पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। नमामि गंगे काशी क्षेत्र द्वारा योगी वेद विज्ञान अध्ययन पीठ के वैदिक बटुकों के साथ मिलकर यह अभियान चलाया गया।
गौरतलब है कि काशी खंड के अनुसार गंगा अवतरण से पहले ही इस तीर्थ और कुंड का अस्तित्व था। इस दिव्य स्थल की महिमा को ध्यान में रखते हुए नमामि गंगे ने कुंड की सफाई करते हुए वहां विशेष वैदिक अनुष्ठान सम्पन्न करवाया।
धार्मिक अनुष्ठान और वैदिक मंत्रोच्चार
कार्यक्रम के दौरान वैदिक बटुकों ने विष्णु सहस्त्रनाम, द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र, शिव महिम्न स्तोत्रम, और गंगाष्टकम का पाठ किया। इसके पश्चात श्री हरि विष्णु के प्रतीक स्वरूप चक्र पुष्करणी कुंड की आरती उतारी गई और देश-समाज की सुख-समृद्धि की कामना की गई।

‘सबका साथ हो, गंगा साफ हो’ का संदेश
नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक और नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर राजेश शुक्ला ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा,
> “मणिकर्णिका चक्र पुष्करणी कुंड न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि जल संरक्षण की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह तीर्थ पृथ्वी के सभी तीर्थों से श्रेष्ठ है।”
उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु ने यहां भोलेनाथ को प्रसन्न करने हेतु हजारों वर्षों तक तपस्या की थी और कुंड की स्थापना अपने सुदर्शन चक्र से की थी ताकि महादेव और माता पार्वती स्नान कर सकें।
स्वच्छता को लेकर विशेष पहल
इस अभियान के तहत कुंड और गंगा किनारे विसर्जित किए गए कपड़े, पूजन सामग्री और अन्य प्रदूषकों को निकालकर कूड़ेदानों में डाला गया। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को संदेश दिया गया कि पवित्र तीर्थों की गरिमा बनाए रखने के लिए स्वच्छता आवश्यक है।
शवदाह के लिए आने वाले लोगों से भी कुंड की स्वच्छता बनाए रखने की अपील की गई।
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✨ मुख्य विशेषताएं:
चक्र पुष्करणी कुंड में आरती और वैदिक अनुष्ठान
नमामि गंगे द्वारा सफाई अभियान
“सबका साथ हो, गंगा साफ हो” संदेश
राजेश शुक्ला और वैदिक बटुकों की प्रमुख भागीदारी
काशी खंड में वर्णित पौराणिक महत्व का स्थल
Author: Suryodaya Samachar
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