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लोकसभा :- परिसीमन पर दक्षिण भारत एकजुट, कांग्रेस ने बनाया नया सियासी गणित

लोकसभा :- लोकसभा सीटों के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के कई राज्यों में राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। दक्षिणी राज्यों का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को परिसीमन के बाद राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में नुकसान नहीं होना चाहिए।

मौजूदा 543 सीटों पर महिला आरक्षण की मांग

दक्षिण के राज्यों ने लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े परिसीमन प्रस्ताव का विरोध करते हुए मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर ही महिला आरक्षण लागू करने की मांग उठाई है। इस मुद्दे ने केंद्र और दक्षिणी राज्यों के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

कांग्रेस ने साधा दक्षिणी राज्यों का साथ

रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने अपने शासित दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ इस मुद्दे पर रणनीति बनाने की कोशिश तेज कर दी है। इसके अलावा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को भी इस राजनीतिक पहल से जोड़ने की कोशिश की गई है।

कांग्रेस का मानना है कि परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को एक साझा मंच पर लाकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है।

दक्षिणी राज्यों को किस बात की चिंता?

परिसीमन का आधार अगर मुख्य रूप से मौजूदा जनसंख्या के आंकड़ों को बनाया जाता है, तो अपेक्षाकृत अधिक आबादी वाले राज्यों की लोकसभा सीटों में बड़ी वृद्धि हो सकती है। वहीं दक्षिण भारत के कई राज्यों ने दशकों से जनसंख्या नियंत्रण पर बेहतर प्रदर्शन किया है।

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दक्षिणी राज्यों की चिंता है कि इसके बावजूद अगर सीटों के पुनर्वितरण में उन्हें अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व मिलता है, तो इसका असर उनकी राजनीतिक ताकत पर पड़ सकता है।

मुद्दा सिर्फ सीटों का नहीं, राजनीतिक प्रतिनिधित्व का भी

परिसीमन के साथ लोकसभा सीटों की संख्या, राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर बहस जुड़ी हुई है। यही वजह है कि दक्षिण भारत के कई राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एकजुट होते नजर आ रहे हैं।

आने वाले समय में परिसीमन को लेकर केंद्र और दक्षिणी राज्यों के बीच राजनीतिक खींचतान और बढ़ने की संभावना है।

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Author: Suryodaya Samachar

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