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शिक्षामित्र का निधन :- शिक्षामित्र राजेश कुमार चौबे के निधन से शिक्षा जगत में शोक की लहर

शिक्षामित्र का निधन:- [ब्यूरो चीफ रामेश्वर सोनी की स्पेशल रिपोर्ट] प्राथमिक विद्यालय खचार, विकास खंड रॉबर्ट्सगंज में कार्यरत शिक्षामित्र राजेश कुमार चौबे के आकस्मिक निधन से शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई। शनिवार भोर में हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया, जिससे पूरे जनपद सोनभद्र में शिक्षकों और शिक्षामित्रों के बीच शोक की स्थिति उत्पन्न हो गई।

शोकसभा में दी गई श्रद्धांजलि

शिक्षामित्र जिला कार्यालय, राबर्ट्सगंज में एक शोकसभा का आयोजन किया गया, जहाँ शिक्षकों और शिक्षामित्रों ने नम आँखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर संगठन के जिला अध्यक्ष वकील अहमद खान ने कहा कि राजेश कुमार चौबे का निधन परिवार और संगठन के लिए अपूरणीय क्षति है। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान अनुज कुमार सिंह, रामेश्वर प्रसाद सोनी, सुरेंद्र कुमार त्रिपाठी, मायकांत शर्मा, रेखा तिवारी, शिवलता शुक्ला, कलावती देवी, सुमन चतुर्वेदी, अशोक कुमार सिंह और धीरेन्द्र तिवारी समेत दर्जनों शिक्षक और शिक्षामित्र मौजूद रहे।

आर्थिक संकट और सरकारी वादा खिलाफी बनी मौत की वजह

शिक्षामित्र संगठन के सदस्यों ने सरकार को इस मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि शिक्षामित्रों को कम वेतन, अनिश्चित भविष्य और बढ़ती महंगाई के बीच अत्यंत कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। सरकार द्वारा बार-बार मानदेय बढ़ाने के झूठे आश्वासन और वादाखिलाफी के चलते शिक्षामित्र मानसिक तनाव और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।

10,000 रुपये के वेतन में जीवनयापन असंभव

शिक्षामित्रों का कहना है कि 10,000 रुपये प्रति माह का वेतन इस बढ़ती महंगाई में पर्याप्त नहीं है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि 11 महीने के मानदेय के बावजूद उन्हें गर्मी और सर्दी की छुट्टियों का वेतन नहीं मिलता।

राजेश कुमार चौबे की अचानक हुई मृत्यु ने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वह अपने पीछे दो बच्चों (16 और 18 वर्ष के) को छोड़ गए हैं। उनके परिवार पर अब आर्थिक संकट और बढ़ गया है। शिक्षामित्र संगठन ने सरकार से मानदेय में तत्काल बढ़ोतरी और स्थायीकरण की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों की बढ़ती मौतें

यह कोई अकेली घटना नहीं है। उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज और एक्सीडेंट से शिक्षामित्रों की मौत हो रही है। इसकी मुख्य वजह आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और सरकारी उपेक्षा है। लगभग 80% शिक्षामित्रों की उम्र 50 वर्ष से अधिक हो चुकी है, जिन पर बच्चों की पढ़ाई, बेटियों की शादी, वृद्ध माता-पिता की देखभाल और घर खर्च जैसी जिम्मेदारियाँ हैं। ऐसे में कम वेतन में जीवन यापन करना असंभव हो गया है।

शिक्षामित्रों के लिए सरकार से प्रमुख माँगें

1. मानदेय में तत्काल वृद्धि – शिक्षामित्रों को कम से कम 25,000 रुपये मासिक वेतन दिया जाए।

2. स्थायीकरण – शिक्षामित्रों को नियमित सरकारी शिक्षक का दर्जा दिया जाए।

3. समाजिक सुरक्षा – शिक्षामित्रों को स्वास्थ्य बीमा और पेंशन सुविधा प्रदान की जाए।

4. छुट्टियों में वेतन – गर्मी और जाड़े की छुट्टियों में भी मानदेय दिया जाए।

राजेश कुमार चौबे की मृत्यु केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि एक बड़े संकट की निशानी है, जो प्रदेशभर के शिक्षामित्रों को झेलनी पड़ रही है। जब तक सरकार शिक्षामित्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेती, तब तक इस तरह की मौतें लगातार होती रहेंगी। शिक्षामित्र संगठन ने सरकार से तत्काल उचित कार्रवाई की माँग की है ताकि इस तरह की मर्मांतक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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Author: Suryodaya Samachar

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