SHEOHAR News :- शिवहर जिले में 29 मई से 12 जून 2025 तक चलाया गया “विकसित कृषि संकल्प अभियान” आधुनिक कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बनकर उभरा है। इस अभियान का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, शिवहर द्वारा आत्मा शिवहर के सहयोग से किया गया। इसमें डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा एवं महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान, पिपराकोठी के वैज्ञानिकों का सक्रिय मार्गदर्शन रहा।
10,000 किसानों से सीधा संवाद, 90 गांवों का दौरा
अभियान के दौरान विशेषज्ञों की टीम ने 90 गांवों का भ्रमण कर लगभग 10,000 किसानों से सीधा संवाद किया और उन्हें खरीफ मौसम की खेती में वैज्ञानिक पद्धतियों विशेषकर ‘धान की सीधी बुआई’ (DSR) के लाभों से अवगत कराया। इस विधि में पानी की बचत, कम लागत और कम श्रम की जरूरत के चलते इसे पर्यावरण और किसान—दोनों के लिए लाभकारी बताया गया।
जमीनी स्तर पर दिखा असर, किसानों ने अपनाई नई तकनीक
इस अभियान का प्रभाव इतना व्यापक रहा कि कई प्रगतिशील किसानों ने DSR विधि को अपनाना शुरू कर दिया।
हरनाही गांव के किसान श्री संजीव कुमार ने 2 एकड़ में धान की सीधी बुआई की।
बखार चंडिया गांव के प्रभात कुमार ने 1 हेक्टेयर भूमि में इस तकनीक को अपनाया।
पिपराही प्रखंड के धनकौल गांव के श्री मनोज कुमार नारायण सिंह ने 8 एकड़ में यह प्रयोग कर जिले में उदाहरण पेश किया।
वैज्ञानिकों ने दिए तकनीकी सुझाव
डॉ. अनुराधा रंजन कुमार (वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र) ने बताया कि पारंपरिक रोपाई पद्धति में प्रति एकड़ ₹4500 तक लागत आती है, जबकि DSR तकनीक में यह खर्च बहुत कम हो जाता है।
डॉ. सौरभ पटेल ने बताया कि इस विधि के लिए खेत की गहरी जुताई, 2-3 बार रोटावेटर चलाना, और सीड ड्रिल या राइस-व्हीट सीडर का उपयोग ज़रूरी होता है।
खरपतवार नियंत्रण भी जरूरी
इस तकनीक में खरपतवार की अधिक समस्या होने की संभावना रहती है, जिसके समाधान के लिए विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि:
बुआई के 1-3 दिन के अंदर पेंडीमेथालिन 30 EC (1.3 लीटर/एकड़) का छिड़काव किया जाए।
20-25 दिन के अंदर बिसपायरीबैंक सोडियम 10 SL (100 मि.ली./एकड़) का पोस्ट-इमर्जेंस हर्बीसाइड के रूप में प्रयोग किया जाए।
किन किस्मों का करें चयन?
राजेन्द्र भगवती, राजेन्द्र नीलम, और एराइज़ 6444 जैसी मध्यम अवधि की धान की किस्में इस विधि के लिए उपयुक्त पाई गईं हैं।
कृषि को नवाचार की राह पर ले जाता अभियान
आत्मा शिवहर के डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्री हीरालाल ने किसानों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रयोग न केवल लागत कम करते हैं, बल्कि किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर भी बनाते हैं।
यह अभियान साबित करता है कि जब वैज्ञानिक तकनीक, प्रशासनिक सहयोग और किसानों की इच्छाशक्ति एकजुट होती है, तो कृषि में क्रांति संभव है। शिवहर अब आधुनिक, नवाचार-युक्त और टिकाऊ खेती की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है।
Author: Suryodaya Samachar
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