Sarv pitra Amavasya 2024:– सर्व पितृ अमावस्या 2 अक्टूबर को है। उस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। अमावस्या के दिन आप अपने नाराज पितरों को खुश करने के लिए उपाय कर सकते हैं। काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं कि सर्व पितृ अमावस्या पर नाराज पितरों को कैसे खुश किया जाए? अमावस्या के अवसर पर आप अपने पितरों के लिए पंचबलि कर्म जरूर करें।
सर्वपितृ अमावस्या: महत्व, कथा और उपाय
महत्व
सर्वपितृ अमावस्या, जिसे पितृ मोक्ष अमावस्या भी कहा जाता है, श्राद्ध पक्ष की अंतिम तिथि होती है। इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनके लिए किसी कारणवश श्राद्ध नहीं किया जा सका हो। यह तिथि पितरों के मोक्ष और शांति के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। हिंदू धर्म में माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितर पृथ्वी पर आते हैं और उनके वंशजों से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए तर्पण और श्राद्ध की अपेक्षा रखते हैं। सर्वपितृ अमावस्या के दिन किए गए तर्पण से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद वंशजों को प्राप्त होता है।
कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, महाभारत के समय राजा कर्ण जब मृत्यु को प्राप्त हुए, तब उन्हें स्वर्ग में भोजन के रूप में केवल सोने और रत्न प्राप्त हुए। उन्होंने इंद्र देव से इसका कारण पूछा, तो उन्हें बताया गया कि अपने जीवनकाल में उन्होंने कभी अपने पितरों को भोजन नहीं दिया, इसलिए उन्हें ऐसा फल मिला। इसके बाद कर्ण ने इंद्र देव से अपनी भूल सुधारने का उपाय पूछा। तब उन्हें 15 दिनों के लिए धरती पर लौटने और अपने पितरों के लिए श्राद्ध करने का अवसर दिया गया। इन 15 दिनों को ही श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष के रूप में जाना जाता है। कर्ण द्वारा किए गए श्राद्ध के बाद उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ। इसी कारण श्राद्ध पक्ष का विशेष महत्व माना जाता है।
उपाय
सर्वपितृ अमावस्या पर कुछ विशेष उपायों को करना शुभ माना जाता है। ये उपाय पितरों की कृपा प्राप्त करने और जीवन में सुख-समृद्धि के लिए किए जाते हैं:
1. तर्पण और पिंडदान: इस दिन अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान करना सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। इसे आप किसी पवित्र नदी या जलाशय के किनारे कर सकते हैं। यदि संभव न हो, तो घर में भी जल का तर्पण कर सकते हैं।
2. दान-पुण्य: इस दिन ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, और धन का दान करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से अनाज, तिल, चावल, गाय का घी और अन्य खाद्य सामग्री का दान करें। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
3. खीर का भोग: सर्वपितृ अमावस्या के दिन खीर का भोग पितरों को अर्पित करें। इसे बनाने के लिए गाय के दूध और चावल का प्रयोग करें। भोग लगाने के बाद इसे गाय, कुत्ते, कौवे और अन्य प्राणियों को भी खिलाएं।
4. सप्तधान्य का दान: सात प्रकार के अनाज (गेंहू, जौ, तिल, चावल, मक्का, मूंग और उड़द) का दान पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
5. पीपल पूजा: पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और जल अर्पित करें। पीपल को पितरों का वास माना जाता है, और इसे पूजा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
6. गाय की सेवा: गाय को रोटी या चारा खिलाना अत्यंत शुभ होता है। इसे पितरों की संतुष्टि का प्रतीक माना जाता है और इससे वंशजों को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
सर्वपितृ अमावस्या पर इन उपायों को करके आप अपने पितरों की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में शांति और समृद्धि पा सकते हैं।
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Author: Suryodaya Samachar
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