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Saphala Ekadashi 2024: साल की पहली एकादशी, जाने पूजा विधि, व्रत कथा, उपाय आदि….

Saphala Ekadashi 2024: आज साल 2024 की पहली एकादशी है । यह सफला एकादशी है, जो हर साल पौष कृष्ण एकादशी तिथि को मनाई जाती है ।सफला एकादशी को महाएकादशी के रूप में भी जानते है, क्योंकि इस दिन भगवान नारायण का उपवास और व्रत रखने वालों को सफलता ,आरोग्यवान और भगवदधाम प्राप्त करने  का वरदान देते हैं ।सफला एकादशी का व्रत रखने से आयु और स्वास्थ्य की रक्षा होती है । भौतिक सुख और सम्पन्नता प्राप्त होती है । भगवान उसके पिछले सारे पाप नष्ट कर देते हैं। और हमे अपने धाम में जगह देते है ।

आईए जानते हैं सफला एकादशी की कथा :–

Saphala Ekadashi Vrat Katha: पद्म पुराण के अनुसार, एक बार एक राजा थे जिनका नाम महिष्मान था। वे चम्पावती नगरी के राजा था। उनके चार पुत्र थे। उनका सबसे बड़ा पुत्र का नाम लुम्भक था जो चरित्रहीन था। वह हमेशा ही देवताओं , गुरुजनों, वैष्णवो की निंदा करता था। साथ ही जुआं खेलना, मांस भक्षण जैसे गलत कार्यों में लिप्त रहता था। राजा अपने बेटे के इन सभी कार्यों से काफी परेशान था। उसने अपने बड़े बेटे को राज्य से बाहर निकाल दिया। ऐसे में वो जंगल में जाकर रहने लगा।उसने विचार किया की अब पिताजी ने मुझे घर से निकाल दिया है तो मैं दिन में जंगल के जानवरों को मार कर खाऊंगा और रात को लोगों को लूटूंगा।

इस दौरान पौष मास के कृष्ण पक्ष की दशमी की रात्रि आई। इस रात इतनी ठंड थी कि वो रात भर सो न सका। सुबह होते ही उसकी हालत खराब हो गई और वह  प्राणहीन सा हो गया। फिर दिन में जब धूप आई तो उसे होश आया। इसके बाद वो जंगल में फल इक्ट्ठा करने लगा। फिर शाम के समय उसने अपनी किस्मत को कोसा और सभी फल पीपल के पेड़ की जड़ में रख दिए। फिर उसने कहा कि इन फलों से लक्ष्मीपति भगवान विष्णु प्रसन्न हों मेरी भेंट स्वीकार कीजिए।

यह एकादशी का दिन था। इस पूरी रात वो सो न सका। इस तरह अनजाने में ही लुम्भक का एकादशी का व्रत का पालन किया । फिर अगली सुबह एक बहुत ही सुंदर घोड़ा उसके पास आकर खड़ा हो गया और भविष्यवाणी हुई कि तुम्हारे सारे पाप नष्ट हो गए हैं और तुम्हें तुम्हारा राज्य भी वापस मिल गया है । इस व्रत का प्रभाव ऐसा हुआ कि वो अच्छे कर्मों की ओर प्रवृत होने लगा। उसके कुछ समय बाद लुभ्भक के पिता ने उसे सारा राज्य दे दिया और खुद ताप करने चला गया। कुछ दिन के बाद लुम्भक को मनोज्ञ नामक पुत्र हुआ। बाद में जाकर राज्यसत्ता सौंप कर लुम्भक खुद विष्णु भजन में लग गया और विष्णु भक्त बन गया और उसने अपने सारी भौतिक इच्छाओं को शांत करके भौतिक शरीर त्याग कर भगवत धाम को प्राप्त हुआ ।

हम इस कथा से यह समझ सकते हैं कि लुंबक ने अनजाने में ही व्रत का पालन किया और उसे भगवत धाम मिला तो हम भी व्रत का पालन करें अधिक से अधिक भगवान का भजन करें कथा सुने।

नौकरी में सफलता का उपाय….

सफला एकादशी के दिन अपने दाएं हाथ में जल और पीले फूल लेकर भगवान विष्णु से नौकरी में सफलता का वर मांगे । गाय के घी का दीपक जलाएं और नारायण कवच का अवश्य पाठ करें। सफला एकादशी के दिन से लगातार 11 दिन तक नारायण कवच का पाठ जरूर करें । ये उपाय करने से नौकरी की परेशानी खत्म होगी और सफलता मिलेगी ।

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सफला एकादशी पूजा विधि

  • सफला एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान करें।
  • इसके बाद मंदिर की सफाई करें।
  • अब चौकी पर भगवान विष्णु जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • फिर घी का दीपक जलाएं और विष्णु जी को हल्दी, कुमकुम से तिलक करें।
  • मिठाई , फल और तुलसी दल अर्पित करें।
  • शाम को विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करें और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
  • अंत में सफला एकादशी की कथा पढ़ें और आरती करें।
  • हरे कृष्ण महामंत्र का अधिक से अधिक जाप करें।

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Author: Suryodaya Samachar

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