Raipur News :- नवा रायपुर में बुधवार सुबह भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एयरोबेटिक टीम ने जबरदस्त करतब दिखाकर लोगों का दिल जीत लिया। सुबह 10:30 बजे जैसे ही आकाश में फाइटर जेट्स ने उड़ान भरी, पूरे रायपुर का उत्साह चरम पर पहुंच गया।
प्रशासन के मुताबिक, अनुमान से कहीं अधिक भीड़ उमड़ी — करीब चार लाख से ज्यादा लोग एयर शो देखने पहुंचे थे। शो खत्म होने तक लोगों का लगातार पहुंचना जारी रहा। लगभग डेढ़ लाख से अधिक वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई, जिससे आसपास का इलाका पूरा भर गया। लोग जहां जगह मिली, वहीं रुककर सेना के पराक्रम को निहारते रहे।
✈️ आकाश में तिरंगा, हार्ट और एरोहेड फॉर्मेशन ने जीता दिल
सेंध तालाब के ऊपर भारतीय वायुसेना के हॉक एमके-132 फाइटर जेट्स ने नौ विमानों के साथ समां बांध दिया।
उन्होंने “तिरंगा, हार्ट इन द स्काई” और “एरोहेड” जैसे शानदार फॉर्मेशन बनाकर आसमान को देशभक्ति के रंगों में रंग दिया।
वहीं, वायुसेना की स्काई डाइविंग टीम ने ऊंचाई से छलांग लगाकर हवा में लाजवाब स्टंट दिखाए। फ्री फॉल, फॉर्मेशन जम्प और स्मोक ट्रेल्स ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस मौके पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल रेमन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित कई मंत्री, विधायक और सांसद मौजूद थे।
🇮🇳 जानिए किन टीमों ने लिया हिस्सा
आकाश गंगा टीम:
यह भारतीय वायुसेना की स्काई डाइविंग यूनिट है, जो पैराट्रूपर्स से बनी है। ये युद्धकाल में किसी भी इलाके में उतरकर मिशन पूरा करने में सक्षम हैं। शो में इन्होंने फ्री फॉल, फॉर्मेशन जम्प और स्मोक ट्रेल्स के जरिए अपनी निपुणता दिखाई।
गरुड़ कमांडो:
भारतीय वायुसेना की यह स्पेशल फोर्स अपनी तेजी, सटीकता और गुप्त अभियानों के लिए जानी जाती है। इन्हें आतंकवाद-रोधी, स्नाइपिंग, बंधक-मुक्ति और दुश्मन क्षेत्र में ऑपरेशन जैसी ट्रेनिंग दी जाती है।
सूर्यकिरण टीम:
यह हॉक एयरक्राफ्ट पर आधारित एयरोबेटिक यूनिट है। हॉक जेट्स को फाइटर पायलट ट्रेनिंग के लिए सबसे सुरक्षित और स्थिर विमान माना जाता है।
🚗 19 किमी लंबा जाम, 6 घंटे तक ठप रही आवाजाही
नवा रायपुर का सेंध जलाशय इलाका इस दिन इतिहास में दर्ज हो गया।
लोगों की भीड़ इतनी ज्यादा थी कि जिनके लिए जगह नहीं बची, उन्होंने सड़कों पर ही गाड़ियां पार्क कर शो देखना शुरू कर दिया।
तेलीबांधा से सेंध जलाशय तक करीब 19 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया जो लगभग 6 घंटे तक नहीं खुल सका।
ट्रैफिक मैनेजमेंट पूरी तरह चरमरा गया। जिन जगहों पर वाहनों की अनुमति नहीं थी, वहां भी लोगों ने अपने वाहन खड़े कर दिए — यही भीषण जाम की बड़ी वजह बनी।
💬 एयरफोर्स एक्सपर्ट सतीश कुमार (रिटायर्ड) ने बताया
> “एक फॉर्मेशन से दूसरे फॉर्मेशन में जाने में लगभग 6 सेकंड का समय लगता है। हर बार नया डिजाइन और पैटर्न पेश करने की कोशिश होती है। इससे पहले महीनों तक रिहर्सल किया जाता है ताकि हर उड़ान पूरी तरह सुरक्षित रहे।”
उन्होंने बताया कि एक शो में लगभग 120 लोगों की टीम जुटती है — जिनमें फ्लाइट क्रू, इंजीनियर, कम्युनिकेशन और सुरक्षा अधिकारी शामिल होते हैं।
हर शो को पिछले से बेहतर बनाने के लिए लगातार तकनीकी सुधार और अभ्यास किया जाता है।
Author: Suryodaya Samachar
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