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Putrada Ekadashi 2025 :- संतान प्राप्ति की कामना के लिए करें इस व्रत कथा का पाठ, भगवान विष्णु करेंगे हर इच्छा पूरी

Putrada Ekadashi 2025 :- 5 अगस्त 2025 को मनाई जा रही है पुत्रदा एकादशी, जो भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित एक अत्यंत पावन व्रत है। यह व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए फलदायी माना गया है। इस दिन श्रद्धालु लक्ष्मी नारायण जी की विधिपूर्वक पूजा करते हैं और व्रत कथा का श्रवण या पाठ करते हैं। 

📅 पुत्रदा एकादशी 2025: तिथि और महत्व

तिथि: मंगलवार, 5 अगस्त 2025

मास: श्रावण (सावन), शुक्ल पक्ष की एकादशी

महत्व: संतान सुख, सुख-शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए यह एक अत्यंत पुण्यदायी व्रत है।

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में संतुलन, समृद्धि और संतान संबंधी बाधाओं का निवारण होता है।

 

व्रत करने की विधि

1. प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं।

3. दीप, धूप, पुष्प, तुलसी दल, पंचामृत आदि से पूजन करें।

4. “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।

5. व्रत कथा पढ़ें या श्रवण करें।

6. रात्रि में जागरण और कीर्तन करें।

7. द्वादशी के दिन ब्राह्मण भोजन व दान के बाद व्रत का पारण करें।

📜 पुत्रदा एकादशी व्रत कथा (Putrada Ekadashi Vrat Katha)

द्वापर युग में महीजित नामक एक महान प्रतापी राजा हुआ करता था। यशस्वी और धर्मप्रिय राजा महीजित की कोई संतान नहीं थी, जिससे वह सदैव चिंतित रहते थे। उन्होंने एक दिन प्रजा और मंत्रियों की सभा बुलाकर अपने मन की पीड़ा प्रकट की कि योग्य उत्तराधिकारी के बिना राज्य का भविष्य क्या होगा?

सभा ने सुझाव दिया कि इस समस्या का समाधान ऋषि-मुनियों से प्राप्त किया जा सकता है। अगले दिन सभी वन में ऋषि लोमश के पास पहुंचे और राजा की व्यथा सुनाई।

ऋषि लोमश ने बताया कि पूर्वजन्म के पापों के कारण राजा संतानहीन हैं, लेकिन यदि वे और उनकी पत्नी सावन शुक्ल एकादशी को पुत्रदा एकादशी व्रत करेंगे और विष्णु जी की भक्ति करेंगे तो उन्हें संतान प्राप्त होगी।

राजा महीजित ने विधिपूर्वक व्रत किया और भगवान विष्णु की भक्ति में लीन हो गए। कुछ समय बाद उन्हें एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई। तभी से इस एकादशी का नाम पड़ा – पुत्रदा एकादशी।

भगवान् को प्राप्त करने के लिए क्या-क्या आवश्यक है? कैसे मिलेंगे भगवान्…

इस दिन क्या करें, क्या न करें

करें:

व्रत रखें और फलाहार करें।

भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।

एकादशी व्रत कथा अवश्य पढ़ें या सुनें।

न करें:

तामसिक भोजन, जैसे प्याज-लहसुन, मांस-मदिरा का सेवन न करें।

किसी से कटु वचन या विवाद से बचें।

दिन में सोने से परहेज करें।

 

🌿 पुत्रदा एकादशी के लाभ

संतान प्राप्ति की संभावना बढ़ती है।

मनोकामना पूर्ण होती है।

वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है।

भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

 

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📌 नोट: यह व्रत न केवल संतान सुख देने वाला है, बल्कि ईश्वर की भक्ति और जीवन में अनुशासन लाने का भी अद्भुत माध्यम है।

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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