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Mirzapur news :- नंदनकानन एक्सप्रेस का पेंटोग्राफ क्षतिग्रस्त, रेल परिचालन प्रभावित

Mirzapur news :- [रिपोर्टर तारा त्रिपाठी] चुनार रेलवे स्टेशन के आगे चुनार और कैलहट के बीच में बुधवार शाम 7:40 बजे के करीब एक अप्रत्याशित घटना घटी जब 12816 नंदनकानन एक्सप्रेस का पेंटोग्राफ (एक विद्युत संचालित उपकरण जो ओवरहेड तारों से बिजली लेकर इंजन तक पहुंचाता है) क्षतिग्रस्त हो गया। इस कारण डाउन लाइन पर रेल परिचालन बाधित हो गया, जिससे कई ट्रेनें प्रभावित हुईं। ट्रेन के चालक ने तुरंत स्थिति की जानकारी कंट्रोल रूम, प्रयागराज को दी। इसके बाद रेलवे के ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन (टीआरडी) विभाग के अधिकारी और स्टाफ मौके पर पहुंचे और मरम्मत का काम शुरू किया।



घटना स्थल पर कैलहट के निकट कलकलिया नदी के पहले, हवेली ढाबा के पास ट्रेन रुक गई। इससे पहले ही चुनार रेलवे स्टेशन पर क्षिप्रा एक्सप्रेस को भी रोक दिया गया था। यह घटना रेलवे परिचालन के लिए बड़ी चुनौती बन गई, क्योंकि पेंटोग्राफ का उलझना ओवरहेड इलेक्ट्रिक वायरिंग (ओएचई) में गंभीर क्षति का संकेत देता है। रेलगाड़ी का पेंटोग्राफ, जो ट्रेन को चलाने के लिए विद्युत शक्ति प्रदान करता है, ओएचई में फंसकर क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके चलते ओएचई तार भी टूट गए थे। चालक को इस बात का आभास तब हुआ जब चुनार स्टेशन पहुंचते वक्त उसने पेंटोग्राफ से चिंगारी निकलते हुए देखा। यह संकेत था कि पेंटोग्राफ ओएचई से सही तरीके से संपर्क नहीं कर पा रहा था।

तत्काल निर्णय और कार्रवाई

चालक की सतर्कता और त्वरित निर्णय के कारण ट्रेन को सही समय पर रोक दिया गया, जिससे संभावित बड़ी दुर्घटना से बचा जा सका। रेलवे प्रशासन ने घटना की गंभीरता को देखते हुए प्राथमिकता के आधार पर डाउन लाइन पर चलने वाली सभी ट्रेनों को जहां-तहां रोक दिया। इससे परिचालन ठप हो गया, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

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रेलवे टीआरडी विभाग के अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुंचते ही क्षतिग्रस्त पेंटोग्राफ और ओएचई तार की जांच शुरू की। मरम्मत का कार्य शुरू किया गया ताकि जल्द से जल्द रेल परिचालन पुनः प्रारंभ किया जा सके। इस प्रक्रिया में करीब चार से पांच घंटे का समय लग सकता था, क्योंकि पेंटोग्राफ और ओएचई की मरम्मत अत्यधिक सावधानी और तकनीकी कौशल की मांग करती है।

यात्री और उनकी समस्याएं

घटना के बाद नंदनकानन एक्सप्रेस के यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। ट्रेन के अचानक रुकने से यात्री अनिश्चित स्थिति में फंस गए। हालांकि, रेलवे प्रशासन की ओर से यात्रियों को राहत प्रदान करने के लिए प्रयास किए गए, लेकिन यात्रियों में असंतोष स्पष्ट था। रात के समय यात्रा कर रहे यात्रियों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण थी, खासकर जब ट्रेन खुले क्षेत्र में रुकी हो।

चुनार रेलवे स्टेशन पर खड़ी क्षिप्रा एक्सप्रेस के यात्रियों को भी इसी प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्टेशन पर रुकी हुई ट्रेनों में न तो कोई स्पष्ट सूचना थी और न ही आगे की यात्रा के लिए कोई ठोस व्यवस्था। हालांकि, रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को यह आश्वासन दिया कि मरम्मत कार्य समाप्त होते ही ट्रेनों को तुरंत चलाया जाएगा।

रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर चुनार रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर मेजर सिन्हा ने बताया कि अप लाइन पर रेल परिचालन सामान्य था, और ट्रेनें अपनी सामान्य गति से चल रही थीं। समस्या केवल डाउन लाइन पर थी, जहां 12816 नंदनकानन एक्सप्रेस के पेंटोग्राफ की मरम्मत की जा रही थी। उन्होंने आगे बताया कि मरम्मत कार्य पूरा होते ही डाउन लाइन पर भी परिचालन पुनः प्रारंभ कर दिया जाएगा।

रेलवे सूत्रों के अनुसार, पेंटोग्राफ और ओएचई की क्षति की मरम्मत में समय तो लगेगा, लेकिन रेलवे प्रशासन इसे जल्द से जल्द निपटाने का प्रयास कर रहा है ताकि यात्री और गाड़ियां अपने गंतव्य तक पहुंच सकें। इस प्रकार की घटनाएं न केवल परिचालन में विलंब उत्पन्न करती हैं, बल्कि रेल नेटवर्क की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती हैं।

तकनीकी चुनौतियां और उपाय

रेलवे की विद्युतीकृत लाइनों में पेंटोग्राफ और ओएचई का सही संपर्क बनाए रखना अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। पेंटोग्राफ यदि ओएचई में फंसता है या उससे सही ढंग से संपर्क नहीं कर पाता, तो इससे ट्रेन की बिजली आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होती है, जिससे ट्रेन रुक जाती है। ऐसे में रेलवे प्रशासन को इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी निरीक्षण और रखरखाव पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

इस घटना ने रेलवे को एक बार फिर यह याद दिलाया कि ओएचई और पेंटोग्राफ की नियमित जांच और रखरखाव कितना महत्वपूर्ण है। इस घटना के बाद उम्मीद है कि रेलवे प्रशासन इस दिशा में और सख्ती से कदम उठाएगा और तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए नियमित रूप से निरीक्षण कार्य करेगा।

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नंदनकानन एक्सप्रेस के पेंटोग्राफ के क्षतिग्रस्त होने की घटना ने एक बार फिर दिखाया कि रेलवे परिचालन में तकनीकी चुनौतियां कैसे उत्पन्न हो सकती हैं। हालांकि, रेलवे प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई कर स्थिति को नियंत्रित किया, लेकिन यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। ऐसे में रेलवे को भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए अपने निरीक्षण और रखरखाव तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को सुनिश्चित किया जा सके।

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Author: Suryodaya Samachar

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