Mirzapur News :- मीरजापुर जनपद के अहरौरा क्षेत्र में स्थित चूना दरी जलप्रपात, जो प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन का अद्भुत संगम है, आज अपनी बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही पर खुद आंसू बहा रहा है।
लिखनियादरी से लगभग दो किलोमीटर अंदर स्थित यह विहंगम जलप्रपात, चारों ओर पहाड़ियों से घिरा है, जहां से गिरता हुआ जलप्रपात, वृक्षों की झूमती शाखाएं, पशुओं की आवाजें और पक्षियों का कलरव, हर सैलानी को मोहपाश में बाँध लेता है।
यह स्थल सिर्फ एक प्रकृति प्रेमी का सपना नहीं, बल्कि हर मौसम में हज़ारों सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। बारिश के मौसम में तो यह जगह किसी मेले का दृश्य प्रस्तुत करती है। लेकिन, इस प्राकृतिक सौंदर्य के पीछे छिपी है एक क्रूर हकीकत — हर साल यहां लोगों की जान जाती है।
⚠️ मौत का अभिशाप: आंकड़ों में तब्दील होती ज़िंदगियाँ
वर्ष 2022 में 9 मौतें और 2025 में अब तक लखनऊ के दो युवकों की मौत इस बात की गवाही देती है कि यह स्थल अब “सैलानी स्थल” के बजाय “मौत की घाटी” बनता जा रहा है।
स्थानीय जनचर्चा के अनुसार, यह जलप्रपात वन विभाग की आय का स्रोत तो बन गया है — पार्किंग शुल्क, प्रवेश शुल्क आदि से लाखों की आमदनी होती है — लेकिन सुरक्षा, सुविधा और सफाई के नाम पर जीरो है।

न गोताखोर
न सुरक्षा जाल या रस्सी
न प्राथमिक उपचार व्यवस्था
न ही कूड़े-कचरे की सफाई
💸 धन उगाही केंद्र बना चूना दरी, लेकिन सुविधाएँ गायब
यह भी विडंबना है कि पार्किंग शुल्क पीडब्ल्यूडी की सड़क पर लिया जा रहा है, जिस पर स्वयं सवाल खड़े हो रहे हैं। जलप्रपात के भीतर प्रवेश के लिए भी शुल्क वसूला जाता है, लेकिन बदले में कोई सुविधा नहीं मिलती।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह वन विभाग की निष्क्रियता और स्थानीय प्रशासन की अनदेखी का परिणाम है कि अब तक सैकड़ों जानें जा चुकी हैं, लेकिन कोई सबक नहीं लिया गया।
📢 जनता की चेतावनी: आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय ग्रामीणों, समाजसेवियों और पर्यावरण प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि यदि निकट भविष्य में सुरक्षा, सफाई, और आपदा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे बड़े जन आंदोलन को बाध्य होंगे।
अब समय आ गया है कि प्रशासन जागे और चूना दरी जलप्रपात को सिर्फ आय का नहीं, सुरक्षा और सुविधा का केंद्र बनाए।
Mirzapur News :- लिखनियादरी जलप्रपात पर रोक लगाना समाधान नहीं, सुरक्षा व्यवस्था हो पुख्ता
Author: Suryodaya Samachar
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