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Maharashtra vidhansabha election 2024:- बाबा सिद्दिकी की हत्या के बाद क्यों हुए ट्रोल जीशान सिद्दीकी….

Maharashtra vidhansabha election 2024 :- महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के संदर्भ में, एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद उनके बेटे जीशान सिद्दीकी सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना कर रहे हैं। जीशान ने हाल ही में बांद्रा पूर्व सीट पर कांग्रेस के घोषित उम्मीदवार पर टिप्पणी की, जिसके कारण उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

यूजर्स ने जीशान की टिप्पणियों का मजाक उड़ाते हुए उन्हें खुद की गिरेबान में झांकने की सलाह दी है। इस मामले में अभिनेत्री मोनिका भी पीछे नहीं रही हैं; उन्होंने जीशान के बयान पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा, “अपनी गिरेबान में झांकते नहीं।”

इस विवाद ने जीशान सिद्दीकी की छवि को प्रभावित किया है और राजनीतिक चर्चाओं में उन्हें एक अलग नजरिए से देखने का कारण बना है। सोशल मीडिया पर चल रही इस बहस ने राजनीतिक माहौल को और भी गर्म कर दिया है।

जीशान सिद्दीकी ने महाराष्ट्र की राजनीति में रखा कदम

बाबा सिद्दीकी एक समय कांग्रेस के प्रभावशाली नेता थे, और उनके रास्ते पर चलते हुए उनके बेटे जीशान सिद्दीकी ने भी महाराष्ट्र की राजनीति में कदम रखा। जीशान ने 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मुंबई के बांद्रा पूर्व विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक के रूप में चुनाव जीता।

हालांकि, उनके पिता बाबा सिद्दीकी ने कांग्रेस को छोड़कर अजित पवार की एनसीपी में शामिल होने का निर्णय लिया। इस स्थिति में जीशान का राजनीतिक भविष्य स्पष्ट नहीं है; यह अभी तक तय नहीं है कि वह आगामी चुनाव कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में लड़ेंगे या अपने पिता की नई पार्टी एनसीपी से।

इस परिवर्तन ने जीशान की राजनीतिक स्थिति को जटिल बना दिया है और आने वाले चुनावों में उनकी भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार में इस तरह के विभाजन ने राजनीति में उनके निर्णयों को और भी दिलचस्प बना दिया है।

12 अक्टूबर को हुई थी बाबा सिद्दीकी की हत्या

अब महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2024 की आचार संहिता लगने से पहले 12 अक्‍टूबर 2024 को लॉरेंस बिश्‍नोई गैंग ने गोली मारकर बाबा सिद्दीकी की हत्‍या कर दी। इधर, महाविकास अघाड़ी में सीट शेयरिंग फॉर्मूला तय होते ही बुधवार को MVA ने बांद्रा ईस्‍ट सीट से अपना उम्‍मीदवार घोषित कर दिया।

जीशान सिद्दीकी ने लिखा-रिश्ता उसी से रखो जो इज़्ज़त और सम्मान दें

जीशान सिद्दीकी ने हाल ही में एक पोस्ट में लिखा, “रिश्ता उसी से रखो जो इज़्ज़त और सम्मान दें।” उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है, खासकर उनके ट्रोलिंग के संदर्भ में।

जीशान के इस विचार का संदेश स्पष्ट है कि संबंधों में सम्मान और इज़्ज़त की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस विचार को उन्होंने अपने हालिया अनुभवों के संदर्भ में व्यक्त किया, जहां उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। यह बयान उनके लिए एक तरह से आत्म-रक्षा भी है, जिसमें उन्होंने अपने मूल्यों की ओर इशारा किया है।

इस संदेश ने न केवल उनके समर्थकों को प्रेरित किया है, बल्कि ट्रोल्स के खिलाफ एक स्पष्ट जवाब भी दिया है, जिससे उनके व्यक्तित्व और दृष्टिकोण को एक नई पहचान मिली है।

जीशान सिद्दीकी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए अपने विरोधियों पर तंज कसते हुए लिखा, “सुना है पुराने दोस्तों ने वांद्रे पूर्व में अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। साथ निभाना तो कभी इनकी फितरत में था ही नहीं। रिश्ता उसी से रखो जो इज़्ज़त और सम्मान दें, मतलब की भीड़ बढ़ाने का कोई फ़ायदा नहीं। अब फैसला जनता लेगी!!!!”

इस बयान में जीशान ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाने पर लिया है, साथ ही अपने समर्थकों को भी स्पष्ट संदेश दिया है कि वे उन लोगों के साथ रिश्ते बनाए रखें जो सम्मान और इज़्ज़त देते हैं। उनकी यह टिप्पणी आगामी चुनावों को लेकर उनकी आक्रामक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने यह संकेत दिया है कि जनता ही अंतिम निर्णय लेगी।

यह पोस्ट न केवल जीशान के आत्मविश्वास को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वह अपने राजनीतिक दृष्टिकोण को लेकर स्पष्ट और दृढ़ हैं।

मोनिका सिंह का सवाल-जब पार्टी को तुम्हारी जरूरत थी तब तुम दूर खड़े हो गए

जीशान सिद्दीकी की पोस्ट पर मुम्बई की @Dr_MonikaSingh_ ने तीखा जवाब देते हुए लिखा, “क्यों? अब पता चला क्या? तुमने क्या किया था? जब पार्टी को तुम्हारी जरूरत थी तब तुम दूर खड़े हो गए थे साथ छोड़कर। अपनी प्रोफाइल से तक सब कुछ हटा लिया था पार्टी का। अब धोखा नजर आ रहा है। कमाल है यार, लोग अपनी गिरेबान में झांकते नहीं हैं और दूसरों को दोष देते हैं। अभी खुद का ट्वीट पढ़के भी शर्म नहीं आई। ‘पुराने दोस्त’ जब तुम खुद पुराने बोल रहे हो तो तुम क्या चाहते थे, वो तुम्हारी सीट छोड़ दें तुम्हारे लिए। तुम्हारे लिए सहानुभूति है सो अलग चीज है, लेकिन ये राजनीति है, यहां तो लड़ाई आमने सामने होती है।”

डॉ. मोनिका सिंह का यह जवाब जीशान पर एक स्पष्ट कटाक्ष है, जिसमें उन्होंने उनके द्वारा किए गए फैसलों और पार्टी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया है। उनके इस बयान ने जीशान के नेतृत्व और राजनीतिक स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं, जो आगामी चुनावों में उनकी संभावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

इस तरह की बातचीत ने राजनीति के मौजूदा परिदृश्य में एक नया मोड़ लाया है, जहां व्यक्तिगत संबंधों और राजनीतिक loyalties के बीच की रेखाएं धुंधली होती जा रही हैं।

जीशान को निर्दलीय चुनाव लड़ने की सलाह

जीशान सिद्दीकी को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच कई यूजर्स ने उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ने की सलाह दी है।एक यूजर, @yadavendra88, ने लिखा, “सिंपैथी क्यों ले रहो भाई? ‘दोस्त’ से ‘पुराना दोस्त’ किसने किया? आपने वो भी तब जब पार्टी को आपकी जरूरत थी। राजनीति हो या कोई भी प्रोफेशन, ‘दोस्ती’ निभाया जाता है। ‘पुराना दोस्त’ नहीं होता।” इस टिप्पणी में स्पष्ट रूप से जीशान की स्थिति और उनके राजनीतिक फैसलों पर सवाल उठाया गया है।

वहीं, @aasif_435 ने कहा, “सूना है जीशान सिद्दीकी भाई, आपका टिकट पक्का नहीं हुआ है। मुझे उम्मीद है कि आप निर्दलीय भी लड़ो तो जीत जाओगे। भाई, कोरोना काल में आपकी मेहनत जनता ने सब देखी है। इंशाअल्लाह जीत होगी।”

इस तरह की प्रतिक्रियाएँ दर्शाती हैं कि कुछ लोग जीशान को समर्थन दे रहे हैं, जबकि अन्य उनकी रणनीति और रिश्तों पर सवाल उठा रहे हैं। यह चर्चा उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर बढ़ती हुई चिंताओं और आशाओं का प्रतीक है।

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Author: Suryodaya Samachar

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