Lucknow Gen Alpha Students Protest :- राजधानी लखनऊ में शिक्षकों की कमी से नाराज छात्राओं का विरोध-प्रदर्शन एक बार फिर सड़क पर देखने को मिला। स्कूल में शिक्षकों के कई पद लंबे समय से खाली होने का आरोप लगाते हुए छात्राएं सड़क पर धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने सड़क पर जाम लगा दिया और सरकार से जल्द से जल्द शिक्षकों की रिक्तियां भरने की मांग की।
छात्राओं का कहना है कि शिक्षकों की पर्याप्त संख्या नहीं होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि विद्यालय में विभिन्न विषयों के शिक्षकों के पद खाली हैं, जिसके कारण नियमित पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।
शिक्षकों की कमी को लेकर छात्राओं में नाराजगी
प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने कहा कि स्कूल में शिक्षकों की रिक्तियों को जल्द भरा जाना चाहिए, ताकि पढ़ाई सुचारू रूप से संचालित हो सके। छात्राओं का कहना है कि वे अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर हैं और शिक्षकों की कमी का सीधा असर उनकी शिक्षा पर पड़ रहा है।
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छात्राओं ने अपनी मांग को लेकर सड़क पर धरना दिया और संबंधित अधिकारियों से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ।
सरकार द्वारा संचालित है विद्यालय
बताया जा रहा है कि संबंधित विद्यालय का संचालन सीधे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया जाता है। ऐसे में छात्राओं की मांग को लेकर प्रशासन और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
छात्राओं की मांग है कि विद्यालय में खाली पड़े शिक्षक पदों की स्थिति की समीक्षा कर जल्द नियुक्तियां की जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
‘पढ़ाई प्रभावित न हो’—छात्राओं की मांग
प्रदर्शन कर रही छात्राओं का मुख्य जोर इस बात पर है कि शिक्षकों की कमी के कारण उनकी शिक्षा का नुकसान नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध होने से ही सभी विषयों की कक्षाएं नियमित और प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेंगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि छात्राओं के प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है और विद्यालय में रिक्त शिक्षक पदों को भरने की प्रक्रिया कब तक शुरू होती है।
लखनऊ में छात्राओं का सड़क पर उतरकर शिक्षकों की नियुक्ति की मांग करना शिक्षा व्यवस्था से जुड़े एक अहम सवाल को सामने लाता है। सरकारी विद्यालय में शिक्षकों की कमी का मुद्दा यदि लंबे समय तक बना रहता है तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है। ऐसे में छात्राओं की मांग पर संबंधित विभाग की त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Author: Suryodaya Samachar
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