Kerela Election :- केरल के स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने ऐतिहासिक बढ़त दर्ज की है। तिरुवनंतपुरम नगर निगम और त्रिपुनिथुरा नगरपालिका समेत कई प्रमुख शहरी क्षेत्रों में जीत हासिल कर एनडीए ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज कराया है। अब तक वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) के वर्चस्व वाले केरल में यह नतीजा सत्ता संतुलन में अहम मोड़ माना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था में साफ बदलाव देखने को मिला है और यही लोकतंत्र की खूबसूरती है। जनता का फैसला सर्वोपरि होता है, चाहे वह पूरे यूडीएफ के पक्ष में हो या मेरे निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के लिए।
उन्होंने आगे कहा कि उनकी पार्टी राज्य के लिए लगातार काम करती रहेगी। “हम केरल के विकास के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे, जनता की जरूरतों को उठाते रहेंगे और सुशासन के मूल्यों को कायम रखेंगे। आगे बढ़ते रहेंगे।”
त्रिपुनिथुरा में एलडीएफ पर एनडीए की मामूली बढ़त
एर्नाकुलम जिले की त्रिपुनिथुरा नगर पालिका में एनडीए ने बेहद करीबी मुकाबले में बहुमत हासिल किया। 53 सदस्यीय परिषद में एनडीए को 21 सीटें मिलीं, जबकि एलडीएफ ने 20 सीटें जीतीं। कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) 12 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
यह पहली बार है जब भाजपा ने त्रिपुनिथुरा नगर परिषद पर नियंत्रण हासिल किया है।
ए-ग्रेड नगरपालिका मानी जाने वाली त्रिपुनिथुरा में दशकों से सत्ता एलडीएफ और यूडीएफ के बीच बदलती रही है। इस बार नतीजों ने इस परंपरा को तोड़ दिया, जहां कड़े और रोचक चुनावी मुकाबले के बाद एनडीए ने एलडीएफ को सत्ता से बाहर कर दिया।
2020 के स्थानीय निकाय चुनावों में, जब यहां 49 वार्ड थे, तब सीपीआई (एम) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसे 23 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा को 17 सीटों पर जीत मिली थी। इस बार परिषद का विस्तार 53 वार्डों तक होने के साथ ही मतदाताओं की पसंद में बड़ा बदलाव देखने को मिला।
पालक्काड़ नगरपालिका में भाजपा ने बरकरार रखी पकड़
एनडीए ने पालक्काड़ नगरपालिका में भी अपना नियंत्रण बनाए रखा। भाजपा 25 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि यूडीएफ को 18 सीटें मिलीं और एलडीएफ सिर्फ 9 सीटों तक सिमट गई।
इन नतीजों के साथ पालक्काड़ राज्य में भाजपा के सबसे मजबूत शहरी गढ़ों में से एक बना हुआ है।
मतदान और वोटिंग प्रतिशत
केरल के स्थानीय निकाय चुनाव दो चरणों में 9 दिसंबर और 11 दिसंबर को संपन्न हुए। राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक कुल मतदान प्रतिशत 73.69 प्रतिशत दर्ज किया गया। पहले चरण में 70.91 प्रतिशत और दूसरे चरण में 76.08 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
इन नतीजों का असर 2026 में होने वाले केरल विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों और चुनावी रणनीतियों पर पड़ने की संभावना है। खासकर शहरी इलाकों में भाजपा की बढ़त पर सभी दलों की नजर बनी रहेगी।
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Author: Suryodaya Samachar
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