Haryana News :- हरियाणा के सोनीपत से रिश्तों की संवेदनहीनता का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। गांव ककरोई निवासी और कभी बड़े कपड़ा कारोबारी रहे शिवचरण गुप्ता का निधन हो गया, लेकिन उनकी तीनों बेटियां अंतिम विदाई देने तक नहीं पहुंचीं।
तीनों बेटियां हैं शिक्षिका
बताया गया कि शिवचरण गुप्ता ने अपनी तीनों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर शिक्षिका बनाया। एक बेटी नेपाल, दूसरी मुंबई और तीसरी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में रहती है। पिता के निधन के बावजूद कोई भी बेटी अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुई।
अंतिम संस्कार के लिए भेजे ₹5100
परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, बेटियों ने अंतिम संस्कार में आने के बजाय ऑनलाइन ₹5100 भेज दिए। इनमें से एक बेटी वीडियो कॉल के जरिए अंतिम संस्कार से जुड़ी, जबकि बाकी दोनों मौके पर नहीं पहुंचीं।
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समाजसेवियों ने निभाया बेटों का फर्ज
शिवचरण गुप्ता पिछले कई वर्षों से वृद्धाश्रम में रह रहे थे। उनके निधन के बाद समाजसेवी संस्था के सदस्यों ने उन्हें कंधा दिया और पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार कराया।
पहले भी नहीं पहुंची थीं मां के अंतिम संस्कार में
जानकारी के अनुसार, करीब डेढ़ वर्ष पहले जब उनकी पत्नी का निधन हुआ था, तब भी तीनों बेटियां अंतिम संस्कार में शामिल होने नहीं आई थीं। इस घटना ने एक बार फिर बदलते पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक मूल्यों पर सवाल खड़े कर दिए।
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Author: Suryodaya Samachar
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