Google Doodle pays tribute to KK :- कृष्णकुमार कुनाथ, जिन्हें केके के नाम से जाना जाता है, भारतीय संगीत जगत के सबसे प्रतिष्ठित और यादगार गायकों में से एक थे। 23 अगस्त 1968 को दिल्ली में जन्मे केके ने अपनी साधारण शुरुआत से असाधारण ऊँचाइयों तक का सफर तय किया। केके की आवाज़ ने न केवल फिल्मों में बल्कि लाखों दिलों में भी जगह बनाई।
1996 से बॉलीवुड में शुरु किया था सफर
1996 में, केके ने बॉलीवुड में अपना सफर फिल्म “माचिस” के गीत “छोड़ आए हम” के साथ पार्श्व गायक के रूप में शुरू किया। यह गीत विशाल भारद्वाज द्वारा संगीतबद्ध किया गया था और गुलज़ार द्वारा लिखा गया था। इस गाने के साथ ही केके की आवाज़ ने एक खास पहचान बनाई, और यह सिर्फ एक शुरुआत थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा में एक के बाद एक कई सुपरहिट गाने दिए, जो आज भी लोगों की जुबां पर हैं।हालांकि फिल्मों में गायकी से पहले केके ने विज्ञापनों के लिए जिंगल्स गाए थे और उनकी यह प्रतिभा जल्द ही संगीत निर्देशकों की नज़र में आ गई। लेकिन 1999 में उनके पहले एलबम “पाल” ने उन्हें व्यापक लोकप्रियता दिलाई। “यारों” और “पल” जैसे गाने आज भी दोस्ती और यादों का प्रतीक माने जाते हैं, जो हर पीढ़ी में सुने जाते हैं।
केके की आवाज़ में एक अलग तरह की सादगी और भावनात्मक गहराई थी, जो हर गीत को सुनने वालों के दिल तक पहुंचाती थी। चाहे वो रोमांटिक गाने हों या उदासी से भरे गीत, केके की आवाज़ में एक आत्मीयता थी, जिसने उनके गीतों को अविस्मरणीय बना दिया।मार्केटिंग में काम करने के बाद केके ने संगीत की दुनिया में कदम रखा और जल्द ही उन्होंने खुद को एक सफल गायक के रूप में स्थापित कर लिया। उनकी अद्वितीय शैली और आवाज़ ने उन्हें अपने समकालीन गायकों से अलग पहचान दिलाई।
A song about love at first sight that makes you fall in love with it every time it plays 🎵❤️
This #GoogleDoodle celebrates the voice of KK that will stay in our hearts forever 🥹 pic.twitter.com/kLPIyFTVso— Google India (@GoogleIndia) October 25, 2024
गूगल डूडल ने दिया ट्रिब्यूट
केके, जिन्हें भारतीय संगीत जगत में “द मेस्मेराइज़र” के नाम से भी जाना जाता है, ने संगीत की दुनिया में अपनी एक विशेष पहचान बनाई। उनकी संगीत यात्रा की शुरुआत लेस्ले लुईस के मार्गदर्शन में हुई, जिन्होंने उन्हें मुंबई में पहला जिंगल गाने का अवसर दिया। केके ने विभिन्न भाषाओं में 3,500 से अधिक जिंगल्स गाए और इस क्षेत्र में एक मजबूत पहचान बनाई।
पार्श्व गायन में उनकी शुरुआत एआर रहमान के गीत “कल्लूरी साले” और “हेलो डॉक्टर” से हुई, लेकिन फिल्मी दुनिया में उनकी असली पहचान 1996 में फिल्म “माचिस” के गीत “छोड़ आए हम” के माध्यम से बनी। इसके बाद केके ने एक के बाद एक कई हिट गाने दिए, जिनमें “कोई कहे कहता रहे” और “ओ हमदम सुनियो रे” जैसे लोकप्रिय गीत शामिल हैं।
केके की आवाज़ में एक जादू था जो रोमांटिक और भावुक गानों में खासतौर पर झलकता था। उन्हें हिंदी में 500 से अधिक और तेलुगु, बंगाली, कन्नड़, मलयालम जैसी भाषाओं में 200 से अधिक गाने गाने का मौका मिला। 2009 में उन्हें “खुदा जाने” के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का स्क्रीन अवार्ड मिला, जिसने उनकी प्रतिभा को और भी मान्यता दिलाई।
अपनी अद्वितीय शैली और गहराई के लिए मशहूर केके ने अपने करियर में संगीतकारों और गीतकारों के साथ कई यादगार प्रोजेक्ट्स पर काम किया। उनकी अंतिम रचनाओं में से एक, “शेरदिल: द पीलीभीत सागा” के लिए, उन्होंने श्रीजीत मुखर्जी और गुलज़ार जैसे दिग्गजों के साथ मिलकर एक गीत प्रस्तुत किया। केके की आवाज़ ने न केवल गानों को बल्कि सुनने वालों के दिलों को भी जीवन भर के लिए संगीतमय बना दिया।
केके को कई कलाकारों और अभिनेताओं से भी प्रशंसा मिली : Google Doodle pays tribute to KK
केके के काम को अरिजीत सिंह और अभिजीत भट्टाचार्य सहित कई कलाकारों से प्रशंसा मिली। कई अभिनेताओं ने केके को अपना पसंदीदा गायक बताया । मीडिया में उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय और बहुमुखी गायकों में से एक के रूप में वर्णित किया जाता है। इंडिया टीवी ने उन्हें अपनी “सर्वकालिक शीर्ष 10 बॉलीवुड गायकों” की सूची में रखा।
उन्होंने 31 मई, 2022 को दक्षिण कोलकाता के नज़रुल मंच में एक संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया। संगीत कार्यक्रम के बाद, उन्होंने अस्वस्थ महसूस करने और कार्डियक अरेस्ट का अनुभव करने की शिकायत की। केके को कलकत्ता मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। केके के शव परीक्षण में मौत का संभावित कारण मायोकार्डियल इंफार्क्शन बताया गया। उनकी मृत्यु से संबंधित तीन जनहित याचिकाएँ कलकत्ता उच्च न्यायालय में दर्ज की गईं। पश्चिम बंगाल सरकार ने केके को बंदूक की सलामी दी। उनका अंतिम संस्कार वर्सोवा हिंदू कब्रिस्तान में किया गया, जिसमें परिवार, दोस्त और सहकर्मी शामिल हुए।
प्रशंसकों के दिलों में उनकी मधुर यादें फिर से ताज़ा हो गई
आज गूगल ने एक खास डूडल के माध्यम से बॉलीवुड की जादुई और भावपूर्ण आवाज़, कृष्णकुमार कुनाथ, जिन्हें केके के नाम से जाना जाता है, को श्रद्धांजलि दी। इस डूडल ने केके के अद्वितीय सफर और उनकी अविस्मरणीय आवाज़ को याद किया, जिसने लाखों संगीत प्रेमियों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी है।
केके की आवाज़ में एक ऐसा अपनापन और गहराई थी जो सुनने वालों को अपने भावों में डुबो देती थी। उन्होंने 1996 में फिल्म “माचिस” के गाने “छोड़ आए हम” से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की, और फिर “यारों,” “पल,” “तड़प तड़प,” और “खुदा जाने” जैसे अनगिनत यादगार गीत गाए, जो आज भी श्रोताओं के दिलों को छूते हैं।
गूगल डूडल के जरिए केके को दी गई इस श्रद्धांजलि ने उनके प्रशंसकों के दिलों में उनकी मधुर यादें फिर से ताज़ा कर दी हैं। गूगल का यह कदम उन सभी के लिए एक भावनात्मक क्षण है जिन्होंने केके की आवाज़ में अपना सुख-दुख पाया है।

Author: Suryodaya Samachar
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