
Five Star hotel food :- कर्नाटक और महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया कार्रवाई ने खाने की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के दौरान फाइव-स्टार होटलों, रेस्टोरेंट्स, सरकारी कैंटीन और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में एक्सपायर्ड और खराब खाद्य सामग्री मिलने के मामले सामने आए हैं।
फाइव-स्टार होटलों की रसोई में मिली खराब सामग्री
कर्नाटक में FDA की टीमों ने बेंगलुरु के कई बड़े होटलों और रेस्टोरेंट्स की जांच की। अधिकारियों को कुछ जगहों पर सड़ा हुआ मांस, फंगस लगी सब्जियां, एक्सपायर्ड डेयरी और बेकरी उत्पाद तथा इस्तेमाल किया हुआ तेल मिला। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री जब्त कर नष्ट की गई और कई जगहों पर नोटिस भी जारी किए गए।
एक जांच में एक होटल की रसोई से खराब चिकन और बीफ समेत अन्य खाद्य सामग्री मिली, जिसे अधिकारियों ने मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाया। खराब रखरखाव के चलते संबंधित किचन को बंद भी किया गया।
सरकारी कैंटीन भी जांच के दायरे में
मामला सिर्फ निजी होटल और रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं रहा। बेंगलुरु में सरकारी प्रतिष्ठानों की कैंटीनों की जांच के दौरान भी एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री और कॉकरोच जैसी स्वच्छता संबंधी समस्याएं सामने आईं। विधानसभा परिसर और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कैंटीनों पर भी कार्रवाई की खबर सामने आई है।
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महाराष्ट्र में भी FDA का सख्त एक्शन
महाराष्ट्र में भी खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई तेज की गई है। मुंबई में FDA की जांच के दौरान कुछ प्रतिष्ठानों और क्विक-कॉमर्स स्टोर्स में कॉकरोच, अनुचित स्टोरेज और एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद मिलने के बाद लाइसेंस निलंबित करने जैसी कार्रवाई की गई।
अब सबसे बड़ा सवाल—आपकी थाली में खाना कितना सुरक्षित?
इन कार्रवाइयों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाहर होटल, रेस्टोरेंट या कैंटीन में खाना खाने वाले लोगों को आखिर कैसे भरोसा हो कि उन्हें ताजा और सुरक्षित भोजन ही परोसा जा रहा है। खाद्य सुरक्षा सिर्फ खाने के स्वाद या होटल की चमक-दमक से तय नहीं होती, बल्कि सही तापमान पर स्टोरेज, साफ-सफाई, एक्सपायरी डेट की जांच और सुरक्षित तरीके से खाना तैयार करने जैसे मानकों का पालन भी जरूरी है।
FDA की हालिया कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि खाने की सुरक्षा की जांच सिर्फ छोटे दुकानदारों तक सीमित नहीं रह सकती। बड़े होटल और सरकारी कैंटीन भी नियमित निगरानी के दायरे में होने चाहिए।
Author: Suryodaya Samachar
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