Big accident in Almoda (Uttarakhand) :- उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में सोमवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया, जिसमें यात्रियों से भरी एक बस 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। यह दुर्घटना अल्मोड़ा के पास स्थित मार्चुला इलाके में हुई। इस बस में 42 यात्री सवार थे और फिलहाल 15 शव बरामद किए जा चुके हैं, जिससे मृतकों की संख्या में इजाफा होने की आशंका है। दुर्घटना के बाद कई यात्री घायल हो गए, जिनमें से कुछ ने खुद को बस से बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की, जबकि अन्य मौके पर ही अपनी जान गंवा बैठे।
दुर्घटना का विवरण
यह दुर्घटना सोमवार सुबह उस समय हुई जब बस नैनी डांडा से रामनगर की ओर जा रही थी। रास्ते में सारड बैंड के पास ड्राइवर ने बस से नियंत्रण खो दिया और वह 100 मीटर गहरी खाई में गिर गई। खाई में गिरते हुए बस लुढ़कती हुई नीचे गीत जागीर नदी के पास पहुँच गई। इस दुर्घटना में बस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे यात्रियों की जान बचाना मुश्किल हो गया। घटनास्थल पर बिखरी हुई बस और चीख पुकार की आवाज़ों से वहाँ के वातावरण में भय का माहौल बन गया।
राहत और बचाव कार्य
हादसे की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम मौके पर पहुँच गई। SDRF की टीम और स्थानीय लोग राहत और बचाव कार्यों में जुट गए। बचाव दलों ने गहरी खाई में उतर कर यात्रियों को निकालना शुरू किया। अब तक 15 शवों को बाहर निकाला जा चुका है और अन्य घायल यात्रियों को प्राथमिक चिकित्सा देकर अस्पताल पहुंचाया गया है। घायलों में कई की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों की मदद
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने भी बचाव कार्य में हिस्सा लिया। सड़क के पास से ही वे आवाज़ों को सुनकर घटनास्थल पर पहुंचे और घायलों की मदद करने में जुट गए। स्थानीय निवासियों ने घायलों को तुरंत अस्पताल पहुँचाने में मदद की और इस आपदा के दौरान एकजुटता का परिचय दिया। घायलों को पास के अस्पतालों में पहुँचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, और डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने के लिए प्रयासरत है।
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हादसे का कारण अज्ञात
फिलहाल दुर्घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है। यह बस एक निजी कंपनी की बताई जा रही है, जो नियमित रूप से इस रूट पर संचालित होती थी। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए प्रशासनिक जांच की जा रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह दुर्घटना चालक की लापरवाही, सड़कों की स्थिति, या तकनीकी खराबी के कारण हो सकती है। इस रूट पर पहले भी ऐसे हादसे हो चुके हैं, जिससे यह मार्ग बेहद खतरनाक माना जाता है। दुर्घटना का एक मुख्य कारण सड़क का संकरा और पहाड़ी इलाका भी हो सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का दुःख
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर गहरा दुःख जताया है। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को हर संभव मदद पहुँचाने और पीड़ितों के परिवारों को हरसंभव सहायता देने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जानकारी दी है कि दुर्घटना के शिकार लोगों के परिवारों की मदद के लिए सरकार हर संभव कदम उठाएगी। साथ ही, मुख्यमंत्री ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है और प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह जल्द से जल्द सभी यात्रियों की स्थिति की जानकारी दे।
उत्तराखंड की खतरनाक सड़कें
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में इस प्रकार के सड़क हादसे आम होते जा रहे हैं। यहाँ की संकरी और घुमावदार सड़कों पर वाहन चलाना अत्यंत जोखिम भरा होता है। इस तरह की घटनाओं में अक्सर यात्रियों की जान चली जाती है। कई बार खराब मौसम और सड़कों की कमजोर हालत भी दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। प्रशासन द्वारा इन सड़कों की स्थिति को बेहतर बनाने और यातायात सुरक्षा के उपाय करने की जरूरत महसूस की जा रही है। इस हादसे ने एक बार फिर उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिवारों का शोक और दुःख
इस हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। किसी का बेटा, किसी की बेटी या कोई बुजुर्ग अपनी जिंदगी खो बैठा। परिजन इस खबर को सुनकर टूट गए हैं और कई परिवारों ने प्रशासन से उचित मुआवजा और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उपाय करने की मांग की है। पीड़ित परिवारों की दर्दनाक स्थिति ने पूरे उत्तराखंड को शोक में डुबा दिया है।
सुरक्षा उपायों की जरूरत
इस हादसे ने उत्तराखंड सरकार और प्रशासन को सड़क सुरक्षा पर गंभीरता से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षित ड्राइविंग, ड्राइवरों की ट्रेनिंग, सड़क पर चेतावनी संकेत और वाहनों की नियमित जांच जैसे उपायों की आवश्यकता है। इसके साथ ही सड़कों की स्थिति को बेहतर बनाने और खतरनाक क्षेत्रों पर उचित संकेत लगाने की आवश्यकता है।

Author: Suryodaya Samachar
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