Varanasi news :- भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में महत्वपूर्ण माने जाने वाले दिन 12 जून 1975 की स्मृति में डॉ. राम मनोहर लोहिया पी.जी. कॉलेज, भैरवतालाब तथा राजातालाब तहसील परिसर में “12 जून 1975 : भारतीय लोकतंत्र का ऐतिहासिक दिन” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने भारतीय लोकतंत्र, न्यायपालिका की स्वतंत्रता तथा संविधान की सर्वोच्चता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अवैध घोषित किए जाने का निर्णय भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह फैसला लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का सशक्त उदाहरण माना जाता है।
वक्ताओं ने बताया कि न्यायालय के इस निर्णय के बाद देश की राजनीतिक परिस्थितियों में व्यापक बदलाव देखने को मिला। लोकनायक लोकबंधु राजनारायण के नेतृत्व में तत्कालीन प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग तेज हुई और राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आ गई। बढ़ते राजनीतिक दबाव और अस्थिरता के बीच 25 जून 1975 की मध्यरात्रि को देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया, जिसके दौरान नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए, विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया तथा प्रेस की स्वतंत्रता पर भी नियंत्रण स्थापित किया गया।
संगोष्ठी में विशेष रूप से लोकबंधु राजनारायण के योगदान और संघर्ष को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि राजनारायण ने 1971 के रायबरेली लोकसभा चुनाव में कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उनकी याचिका के आधार पर आया निर्णय भारतीय लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता का प्रतीक बन गया। उपस्थित जनों ने उनके साहस, संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण को नमन किया।
कार्यक्रम में लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती, नागरिक कर्तव्यों और संविधान के प्रति जागरूकता पर भी विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है।
संगोष्ठी को प्रबंधक सुशील सिंह तोयज, तहसील बार के पूर्व महामंत्री प्रदीप कुमार सिंह, हिंदू महासभा के जिला अध्यक्ष एडवोकेट विशाल नारायण सिंह, प्रोफेसर सुमन लता, प्रोफेसर एन.एन. राय, डॉ. के.एस. पाठक, रवि कुमार एवं एडवोकेट सुशील सिंह सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर आशुतोष कुमार ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
संगोष्ठी में बड़ी संख्या में शिक्षकों, अधिवक्ताओं, विद्यार्थियों एवं गणमान्य नागरिकों ने भाग लेकर भारतीय लोकतंत्र के इस ऐतिहासिक अध्याय को याद किया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
Author: Suryodaya Samachar
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