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भारत-पाकिस्तान तनाव पर चीन की प्रतिक्रिया: शांति की अपील और मध्यस्थता का संकेत

भारत-पाकिस्तान तनाव पर चीन की प्रतिक्रिया:- भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर चीन की ओर से एक बार फिर शांतिपूर्ण समाधान की अपील की गई है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने सोमवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि चीन मौजूदा हालात को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है और दोनों देशों से संयम बरतने की अपील करता है। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान न केवल एक-दूसरे के पड़ोसी हैं, बल्कि चीन के भी पड़ोसी हैं, ऐसे में क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, “हमने भारत-पाकिस्तान के बीच जारी स्थिति पर चीन का रुख स्पष्ट कर दिया है। चीन सभी तरह के आतंकवाद का विरोध करता है और हमेशा शांति एवं स्थिरता का पक्षधर रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों को ऐसे किसी भी कदम से बचना चाहिए, जिससे तनाव और गहरा हो या क्षेत्रीय शांति को खतरा हो।

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यह बयान ऐसे समय पर आया है जब हाल ही में भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर कार्रवाई की है। भारत द्वारा इस कार्रवाई में करीब 100 आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया है। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से सीमा पर गोलाबारी तेज हो गई है, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है।

चीन का यह बयान न केवल दोनों देशों को संयम बरतने की सलाह देता है, बल्कि एक परोक्ष संदेश भी देता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब इस मुद्दे में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। प्रवक्ता ने कहा, “हम संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की बात करते हैं और आशा करते हैं कि दोनों पक्ष उस दिशा में कार्य करेंगे, जिससे आपसी विवादों को संवाद के माध्यम से सुलझाया जा सके।”

विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन का यह रुख उसके क्षेत्रीय हितों से भी जुड़ा हुआ है। भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध या कोई बड़ा सैन्य संघर्ष न केवल दक्षिण एशिया में अस्थिरता ला सकता है, बल्कि चीन की व्यापारिक और रणनीतिक योजनाओं को भी प्रभावित कर सकता है, खासकर जब चीन पाकिस्तान के साथ ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा’ (CPEC) जैसी बड़ी परियोजनाओं में निवेश कर रहा है।

इसके अलावा, चीन ने यह संकेत भी दिया है कि वह तनाव कम करने के लिए अन्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। यह एक तरह से मध्यस्थता का प्रस्ताव माना जा सकता है, हालांकि भारत परंपरागत रूप से किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता।

इस घटनाक्रम से यह साफ है कि भारत-पाक तनाव अब केवल द्विपक्षीय मसला नहीं रह गया है, बल्कि इसकी गूंज अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी सुनाई देने लगी है। चीन की यह प्रतिक्रिया उसी व्यापक रणनीतिक पटल पर रखी जा सकती है, जहां क्षेत्रीय शांति, वैश्विक स्थिरता और आपसी समझ सर्वोपरि माने जाते हैं।

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Author: Suryodaya Samachar

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