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भारत-पाकिस्तान तनाव: कैसे पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है असर?

भारत-पाकिस्तान तनाव: पड़ोसी देशों की चिंता और रणनीति

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव न केवल इन दोनों परमाणु संपन्न देशों के लिए बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। गुरुवार को हुई ताज़ा घटनाओं में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर सैन्य कार्रवाई के दावे किए, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता की आशंका और गहरा गई है।

भारत के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसने लाहौर के पास एक एयर डिफेंस सिस्टम को सफलतापूर्वक नष्ट किया है, वहीं पाकिस्तान ने भारत के 25 ड्रोन मार गिराने का दावा किया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, पर इससे स्पष्ट है कि हालात सामान्य नहीं हैं।

पड़ोसी देशों की स्थिति: चुप्पी में व्यावहारिकता

इस बढ़ते तनाव को देखते हुए सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि भारत और पाकिस्तान के पड़ोसी देश – जैसे नेपाल, भूटान, श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार और अफ़ग़ानिस्तान – क्या रुख़ अपनाएंगे?

दक्षिण एशिया की भू-राजनीति पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकतर देश तटस्थ रुख़ अपनाएंगे। अफ़ग़ानिस्तान को छोड़ दें तो बाक़ी देशों की प्राथमिकता अपनी आर्थिक स्थिरता और घरेलू मुद्दे हैं।

आर्थिक संकट और सामाजिक प्रभाव

डॉ. शुभदा चौधरी, जो मिडिल ईस्ट इनसाइट्स प्लेटफॉर्म की संस्थापक हैं, बताती हैं कि भारत और पाकिस्तान के अधिकतर पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्था अभी भी कोविड महामारी के झटकों से उबर नहीं पाई है। ऐसे में कोई भी सैन्य संघर्ष इन देशों की अर्थव्यवस्था को अप्रत्यक्ष रूप से झटका देगा।

नेपाल का भारत के साथ लगभग 60 प्रतिशत व्यापार है, जो सीमा तनाव के चलते बाधित हो सकता है। नेपाल जैसी भूमि-बंद देश के लिए बंदरगाहों तक पहुँच और सप्लाई चेन का बाधित होना एक बड़ा संकट बन सकता है। इसी तरह भूटान, जो भारत के पर्यटन उद्योग से काफी जुड़ा है, वहाँ भी पर्यटकों की संख्या में गिरावट देखने को मिल सकती है।

बांग्लादेश की कूटनीतिक स्थिति

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने हाल के महीनों में पाकिस्तान के साथ नज़दीकियाँ बढ़ाई हैं, जिससे भारत के साथ उनके संबंधों में खटास आई है। भारत बांग्लादेश में बड़ा निवेश करता आया है, और युद्ध जैसे हालात बनने पर ये आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित हो सकती हैं।

श्रीलंका और भारत की साझेदारी पर असर

श्रीलंका की हालिया आर्थिक संकट की घड़ी में भारत ने उसे सहायता प्रदान की थी। दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी है, और पर्यटन श्रीलंका की आय का बड़ा स्रोत है। ऐसे में श्रीलंका चाहता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जल्द खत्म हो।

शांति की ज़रूरत

धनंजय त्रिपाठी, जो साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर हैं, का मानना है कि भारत एक क्षेत्रीय आर्थिक शक्ति है और उसके साथ जुड़े देशों को युद्ध नहीं, व्यापार की ज़रूरत है। वह कहते हैं कि “तनाव अगर बढ़ता है तो सबसे ज़्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोज़गार, व्यापार और स्थिरता पर निर्भर हैं।”

कुल मिलाकर, दक्षिण एशिया के छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश इस तनाव को लेकर चिंतित हैं, लेकिन वे खुलकर किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय शांति और स्थिरता की उम्मीद कर रहे हैं।

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Author: Suryodaya Samachar

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